हैदराबाद , मार्च 02 -- अंतरराष्ट्रीय व्यापार अकादमी, दक्षिण एशिया बोर्ड के अध्यक्ष और आईआईएम बैंगलोर के पूर्व डीन, प्रख्यात शिक्षाविद प्रोफेसर एस रघुनाथ ने कहा है कि कुछ ही लोग उद्देश्य, विश्वसनीयता एवं संस्कृति पर आधारित ऐसे संस्थान बना पाते हैं जो पीढ़ियों तक कायम रहते हैं।

प्रोफेसर रघुनाथ ने हैदराबाद स्थित आईसीएफएआई में "विरासत नेतृत्व: समाज में बदलाव लाने वाली संस्थाओं का निर्माण" विषय पर 14वां एन जे यशस्वी मेमोरियल व्याख्यान देते हुए कहा कि एन जे यशस्वी का दृढ़ विश्वास था कि स्थायी संस्थाओं को स्पष्ट उद्देश्य वाली भावना पर आधारित होना चाहिए। समय के साथ विश्वसनीयता प्राप्त करनी चाहिए और एक मजबूत मूल्य-आधारित संस्कृति का पोषण करना चाहिए।

प्रोफेसर रघुनाथ ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभाव के बारे में कहा कि मात्र ज्ञान प्राप्त करने का युग अब समाप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि एआई की तीव्र विश्लेषण एवं सूचना प्रसंस्करण क्षमता के कारण, विशेष रूप से अनिश्चितता से भरी परिस्थितियों में, मनुष्यों को उनके विवेक, नैतिकता एवं नैतिक स्पष्टता के लिए ज्यादा महत्व दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि एआई सार्थक मानवीय योगदान की जगह नहीं लेगा बल्कि संस्थागत कामकाज को नया रूप देगा, जिससे मनुष्यों पर बुद्धिमत्ता एवं विवेक के साथ निर्णय लेने की अधिक जिम्मेदारी आएगी।

उन्होंने इस बात पर बल दिया कि शैक्षणिक संस्थानों को केवल ज्ञान का संचारक होने से आगे बढ़कर ज्ञान का मार्गदर्शक बनने की दिशा में बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि रचनात्मकता, कल्पनाशीलता एवं चरित्र ही भविष्य को परिभाषित करेंगे।

एन जे यशस्वी की विरासत से प्रेरणा लेते हुए, प्रोफेसर रघुनाथ ने छात्रों एवं शिक्षकों से सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करने पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया और इस बात पर बल दिया कि मानव-प्लस-एआई की दुनिया में मानवीय मूल्य ही अंततः समाज को आकार देंगे।

इससे पहले, अपने स्वागत भाषण में आईसीएफएआई फाउंडेशन फॉर हायर एजुकेशन के कुलपति (प्रभारी) टी कोटि रेड्डी ने एन जे यशस्वी के जीवन एवं योगदान को याद करते हुए उन्हें एक राष्ट्र निर्माता कहा जिनका मानना था कि शिक्षा को चरित्र का निर्माण करना चाहिए, बुद्धि को तेज करना चाहिए और डिग्री एवं विषयों से परे जिम्मेदारी को प्रेरित करना चाहिए।

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