इस्लामाबाद , मार्च 30 -- पाकिस्तान अपने प्रवासी नागरिकों के विदेशों में जमा लगभग 20 अरब डॉलर की राशि वापस लाने के रास्ते तलाश रहा है।
वैश्विक अनिश्चितता, विशेष रूप से ईरान संघर्ष के कारण पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण निवेशक अब अपनी संपत्तियों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने पर विचार कर रहे हैं।
अधिकारियों ने बताया कि अनुमानित करीब 5.6 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये की यह धनराशि मुख्य रूप से यूरोप और खाड़ी देशों में जमा है। इसे 2018-19 की कर माफी योजनाओं के तहत घोषित तो किया गया था, लेकिन कभी पाकिस्तान वापस नहीं लाया गया।
आर्थिक दबाव के इस दौर में अब इसे विदेशी मुद्रा भंडार के लिए एक संभावित सहारे के रूप में देखा जा रहा है। सरकार इस निवेश को बढ़ावा देने के लिए रोशन डिजिटल अकाउंट (आरडीए) के दायरे को बढ़ाने पर विचार कर रही है। मूल रूप से प्रवासी पाकिस्तानियों के लिए बनाये गये इस प्लेटफॉर्म में अब विदेशी नागरिकों, कंपनियों और यहां तक कि घरेलू निवासियों को भी शामिल किया जा सकता है।
अधिकारी विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए टैक्स छूट, विशेष रूप से रियल एस्टेट क्षेत्र में रियायतों की जांच कर रहे हैं। चर्चा के अधीन एक प्रस्ताव में घोषित संपत्ति के मूल्य पर 10 प्रतिशत कर लगाने की बात कही गयी है, जबकि अघोषित या अवैध संपत्ति रखने वालों के लिए रास्ते बंद रखे जायेंगे।
अधिकारियों का कहना है कि ईरान संघर्ष से जुड़ी बदलती वैश्विक परिस्थितियों ने उन निवेशकों के बीच जोखिम की धारणा बढ़ा दी है, जिनकी संपत्ति इस क्षेत्र में है। इससे पाकिस्तान के लिए इस पूंजी के एक हिस्से को अपनी औपचारिक अर्थव्यवस्था में वापस लाने का अवसर खुला है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित