नयी दिल्ली , फरवरी 04 -- प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जालंधर क्षेत्रीय कार्यालय ने बुधवार को जानकारी दी कि उसने 'व्यूनाउ ग्रुप ऑफ कंपनीज' से जुड़े धन शोधन की जांच के सिलसिले में 19.10 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है।

ईडी ने गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) पुलिस और पंजाब पुलिस की दर्ज की गई विभिन्न प्राथमिकियों के आधार पर 'धन शोधन निवारण अधिनियम' (पीएमएलए) के तहत अपनी जांच शुरू की थी। जांच के दौरान, ईडी को पता चला कि व्यूनाउ ग्रुप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और संस्थापक सुखविंदर सिंह खरौर ने अन्य आरोपियों और संस्थाओं के साथ मिलीभगत करके कई हजार करोड़ रुपये के 'क्लाउड पार्टिकल घोटाले' को अंजाम दिया।

एक ईडी अधिकारी ने जानकारी दी, "क्लाउड पार्टिकल का यह व्यवसाय 'बिक्री और पट्टा वापसी' (एसएलबी) मॉडल पर आधारित था, जो वास्तव में पूरी तरह अस्तित्वहीन पाया गया और निवेशकों को ठगने के लिए इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया था। हमें यह भी पता चला कि व्यूनाउ ग्रुप का पूरा व्यवसाय महज धन के चक्रीय घुमाव की एक योजना थी। क्लाउड पार्टिकल्स की बिक्री के नाम पर निवेशकों से कुल 3,700 करोड़ रुपये एकत्र किए गए थे, जिसमें से 1,800 करोड़ रुपये निवेशकों को किराये के रूप में वापस कर दिए गए। अपराध की शेष आय (पीओसी) का उपयोग व्यावसायिक उद्देश्यों के अलावा अन्य कामों के लिए किया गया और इसे वीएमएसएल तथा समूह की कंपनियों ने अपने सहयोगियों को भारी कमीशन देने, विलासिता के वाहन, सोना और हीरे खरीदने, फर्जी कंपनियों के माध्यम से करोड़ों रुपये इधर-उधर करने और संपत्तियों में निवेश करने के लिए इस्तेमाल किया गया।"ईडी ने आगे कहा कि जांच के दौरान, पूर्व में कुर्क/जब्त की गई चल और अचल संपत्तियों के अतिरिक्त 19.10 करोड़ रुपये की नई 'अपराध की आय' की पहचान की गई, जो अचल संपत्तियों, सावधि जमा (एफडी) और सूचीबद्ध शेयर होल्डिंग्स के रूप में है।

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