प्रयागराज , दिसंबर 29 -- उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिला कारागार में सोमवार को एक संगोष्ठी के माध्यम से प्रकृति के करीब रह कर जीवन को स्वस्थ्य रखने के तौर तरीके बताये गये। पुलिस योजना निदेशक डा केएन सिंह ने वरिष्ठ जेल अधीक्षक अमिता दुबे की मौजूदगी में जिला कारागार में ''हरे पेड़ पौधों से स्वस्थ मानव एवं पर्यावरण'' के विषय पर बोलते हुये जीभ को गले की ओर 135 डिग्री पलटकर तालू से साधारण रूप में टच कर किसी भी अवस्था में बैठकर या चलते फिरते इस स्वतंत्र योगक्रिया को करने का विश्लेषण प्रस्तुत किया जिससे उत्पन्न हुई लार को निगलने से समस्त रोगों का नाश शरीर में होता है तथा मूलाधार से सहस्रार्थ तक सारे चक्र खुल जाते हैं एवं त्रिकाल ज्ञान इसी स्वतंत्र क्रिया से होता है। इस स्वतंत्र मुद्रा से सारे चक्र सक्रिय हो जाते हैं एवं घूमने लगते हैं तथा दुर्विकार, नकारात्मक सोच, अपराधिक मानसिकता इत्यादि योगाग्नि में भष्म होकर व्यक्ति संत स्वरूप हो जाता है जैसे कि ऊॅगलीमार को महर्षि बाल्मीकि इसी योग क्रिया से बनाया गया।
उन्होने कहा कि हरे पेड़-पौधों में 4-5 पीपल के पत्ते और इसके फल खाने से जोड़ो का दर्द दूर होना, नजर तेज होना, चश्मा हटना और समस्त विषाणुयुक्त रोंगो को नष्ट किया जाता है जो कि पीपल के शोध पत्रों में विस्तृत रूप से वर्णित हैं जिन्हें गूगल सर्च में देखा जा सकता है। सफेद मदार कीटाणु नाशक, स्वास्थ्य वर्धक, हाजमा कारक, मोटापा नाशक एवं वायरस वैक्टीरिया इत्यादि कीटाणुओं का नाशक तथा समस्त त्वचारोग नाशक बताया और एक उंगली बराबर पत्ता खाने से हिपेटाईटिस ए, बी, सी, डी तथा पीलिया एक सप्ताह में जड़ से समाप्त हो जाता है। अन्य पेड़-पौधों में लट्जीरा, मकोई, भ्रंगराज, हरसिंगार, दूर्वा घास, नवग्रह जड़ी बूटियाॅ इत्यादि का उपयोग विस्तार से बताया तथा नवग्रह के उपयोग से सकारात्मक ऊर्जा परिसर में उत्पन्न करने के फायदे बताये। विभिन्न रोगों के निदान पर भी कैदियों एवं जेल प्रशासन के स्टाफ के सवालों के जवाब में विस्तार से बताया, जिसमें पथरी हटाना, डायविटीज ठीक होना, दमा, नजर इत्यादि के रोगों के इलाज हरित पेड़-पौधों से बताया।
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