नयी दिल्ली , फरवरी 01 -- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बजट 2026-27 को युवा शक्ति से प्रेरित बताते हुए कहा कि यह शिक्षा और रोजगार सृजन को बढ़ावा देगा और विकास के अगले चरण के लिए एक खाका प्रस्तुत करने वाला है।
श्री प्रधान ने बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शिक्षा मंत्रालय के लिए कुल बजट आवंटन 1,39,289.48 करोड़ तक पहुंच गया है, जो कि वर्ष 2025-26 के बजट की तुलना में 8.27 प्रतिशत अधिक है। यह बजट भारत की विकास क्षमता का पूर्ण उपयोग करने, सभी वर्गों में समावेशी विकास को बढ़ावा देने और विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए एक ठोस खाका प्रस्तुत करता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण को भविष्योन्मुखी, युवा शक्ति से प्रेरित, जनहितैषी, रोजगारोन्मुखी और विकास को प्रोत्साहन देने वाले बजट को पेश करने के लिए आभार व्यक्त किया। इसमें सभी को शामिल किया गया है, लोगों के कल्याण पर जोर दिया गया है और सभी को विशेष रूप से गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के हितों का ध्यान रखा गया है।
उन्होंने कहा कि बजट सभी क्षेत्रों में सर्वांगीण विकास को गति देगा और रणनीतिक एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा। इससे जीवन सुगम होगा, शिक्षा, नवाचार और कौशल विकास को और अधिक मजबूती मिलेगी, लघु एवं मध्यम उद्यमों को मजबूती मिलेगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा और द्वितीय और तृतीय स्तर के शहरों का रूपांतरण नए विकास केंद्रों में होगा। इससे भारत के विकास के अगले चरण को प्राप्त करने के लिए 'सुधार एक्सप्रेस' को गति मिलेगीशिक्षा मंत्री ने कहा कि देश की महिलाओं ने वैश्विक स्तर पर विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) शिक्षा में अच्छा प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि एसटीईएम संस्थानों और पाठ्यक्रमों में लड़कियों के नामांकन को और बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक जिले में एक बालिका छात्रावास स्थापित किया जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि बजट में प्रमुख औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर के आसपास पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप स्थापित करने का प्रस्ताव है। उन्होंने बताया कि 'शिक्षा से रोजगार और उद्यम' के लिए एक उच्चस्तरीय स्थायी समिति का गठन प्रस्तावित किया गया है, जो सेवा क्षेत्र पर केंद्रित उपायों की सिफारिश करेगी और यह विकसित भारत का मुख्य आधार है। यह समिति कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सहित उभरती प्रौद्योगिकियों के रोजगार और कौशल आवश्यकताओं पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करेगी। समिति विद्यालय स्तर से ही शिक्षा पाठ्यक्रम में एआई को शामिल करने और शिक्षक प्रशिक्षण के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषदों (एससीईआरटी) के संस्थानों को उन्नत बनाने जैसे विशिष्ट उपायों का प्रस्ताव करती है।
श्री प्रधान ने 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 कॉलेजों में भारत के एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (एवीजीसी) कंटेंट क्रिएटर लैब्स की स्थापना की सराहना की। इस परियोजना का उद्देश्य बढ़ते एवीजीसी क्षेत्र के लिए 2030 तक 20 लाख पेशेवरों को एक मंच प्रदान करना है।
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