कोच्चि , मार्च 11 -- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि केंद्र की भाजपा नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार ने केरल का नाम बदलकर "केरलम"करने की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा कर दिया है।

उन्होंने बुधवार को कोच्चि में 'अखिल केरल धीवरा सभा' के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह नया नाम मलयाली संस्कृति और पहचान को सही मायने में प्रतिबिंबित करता है।

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत मलयालम भाषा में की और मछुआरा समुदाय को "समुद्र की संतान" कहकर उनका अभिवादन किया। प्रधानमंत्री ने धीवरा समुदाय के केरल की बाढ़ के दौरान की गई निस्वार्थ सेवा को याद करते हुए कहा कि पूरी दुनिया ने उनके साहस को देखा है और इसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

उन्होंने कहा, "मछुआरा समुदाय समुद्र और नदियों को केवल संसाधन नहीं बल्कि अपनी माता के रूप में देखता है।" श्री मोदी ने कहा कि वे यहां आशीर्वाद देने नहीं, बल्कि मछुआरों का आशीर्वाद लेने आए हैं। उन्होंने सामाजिक सुधारक पंडित करप्पन और माता अमृतानंदमयी के योगदान का भी उल्लेख किया, जिन्हें उन्होंने निस्वार्थ सेवा का महान उदाहरण बताया।

मछुआरा समुदाय के आर्थिक सशक्तिकरण पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने मत्स्य पालन के लिए एक अलग मंत्रालय का गठन किया है। उन्होंने कहा कि 'मत्स्य प्रसंस्करण परियोजना' के तहत अकेले केरल के लिए 1,400 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। प्रधानमंत्री ने युवाओं को 'ब्लू इकोनॉमी' (नीली अर्थव्यवस्था) में नेतृत्व करने और मछली निर्यात बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित भी किया।

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