पटना , दिसंबर 16 -- बिहार के उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने मंगलवार को कहा है कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति परिवारों को आवंटित एवं बंदोबस्त की गई भूमि पर उनका दखल-कब्जा सुनिश्चित कराना राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

श्री सिन्हा ने आज बयान जारी कर कहा कि किसी भी स्थिति में कमजोर वर्गों की भूमि पर अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन भूमि दखल देहानी के माध्यम से पर्चाधारियों को शीघ्र न्याय दिलाने का निर्देश जारी किया गया है। राजग सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि एक भी पात्र परिवार अपनी आवंटित भूमि से वंचित न रहे। यह केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और संवैधानिक दायित्व का निर्वहन है।राज्य सरकार हर हाल में गरीब, वंचित और पर्चाधारी परिवारों के साथ खड़ी है।

विभाग के सचिव जय सिंह ने कहा कि राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति परिवारों को आवंटित एवं बंदोबस्त की गई भूमि पर वास्तविक दखल-कब्जा दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में एससी/एसटी परिवारों को दी गई सरकारी, अधिशेष, भूदान अथवा क्रय की गई भूमि से यदि किसी भी निजी व्यक्ति द्वारा बेदखल किया जाता है, तो इसे गंभीर और दंडनीय अपराध माना जाएगा। पर्चाधारियों को शीघ्र न्याय दिलाने एवं भूमि पर उनका अधिकार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विशेष अभियान "ऑपरेशन भूमि दखल देहानी" चलाया जा रहा है।

श्री सिंह ने बताया कि इस अभियान के तहत सभी पात्र एससी/एसटी पर्चाधारियों को उनकी आवंटित भूमि पर शत-प्रतिशत दखल-कब्जा दिलाना राज्य सरकार का लक्ष्य है।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि एससी/एसटी वर्ग के हितों की रक्षा के लिए संवैधानिक और कानूनी प्रावधान पूरी मजबूती के साथ लागू किए जाएंगे। संविधान के अनुच्छेद-46 के तहत अनुसूचित जाति एवं जनजाति के सामाजिक और आर्थिक हितों की विशेष सुरक्षा का प्रावधान है। वहीं, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन अधिनियम, 2015 की धारा 3(एफ) के अंतर्गत एससी/एसटी को आवंटित भूमि पर अवैध कब्जा करना दंडनीय अपराध है।

एससी/एसटी वर्ग की भूमि से जुड़े बेदखली मामलों का निपटारा प्राथमिकता, संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई के साथ किया जाएगा। सभी जिला पदाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए पर्चाधारियों को उनका वैध अधिकार दिलाया जाएगा।

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