अमरोहा , दिसंबर 26 -- उत्तर भारत में प्रदूषण के गहराते संकट पर चिंता जताते हुये भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने आरोप लगाया कि गैस चैंबरों के आगे तंत्र बेबस है, जबकि यह सामान्य जनों के फेफड़ों के लिए सांसों की जंग है।

उन्होंने कहा कि विडंबना देखिए रासायनिक कारखानों के ज़हरीले उत्सर्जन की जिम्मेदारी सबकी है और जवाबदेही किसी की नहीं। नीति निर्माताओं की ये असली परीक्षा है। श्री चौधरी ने प्रदूषण से स्वास्थ्य संबंधी छिपे संकट के हल के लिए साहस तलाशने का आह्वान किया।

किसान नेता ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद गजरौला का जल तथा वायु संकट अब धीरे-धीरे गंभीर रूप लेता जा रहा है, जो अभी तक न तो पहचाना गया और न ही इसके समाधान के लिए प्रर्याप्त क़दम उठाए गए। रासायनिक कारखानों से निकलने वाले ज़हरीले उत्सर्जन के खिलाफ़ चलाए जा रहे छठे दिन के धरने पर पहुंचे भाकियू संयुक्त मोर्चा राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने कहा कि कड़कड़ाती ठंड में किसानों को धरने के लिए मजबूर करने वाले जिम्मेदारों को स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि नेशनल हाईवे-09 समेत इलाके में प्रदूषण के चलते स्माग की मोटी चादर छा जाने से घुटन और बढ़ गई है, जिससे फेफड़ों और सांस संबंधी दिक्कतों से जूझना पड़ रहा है। यहां की हवा और पानी की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में पहुंच गई है।

उल्लेखनीय है कि शहबाजपुर डोर धरने का शुक्रवार को छठा दिन है । भाकियू (संयुक्त मोर्चा) राष्ट्रीय अध्यक्ष ने जिम्मेदारों को चेताया कि यहां के भूजल और वायु प्रदूषण को स्टाक मार्केट के सूचकांक की तरह गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होने कहा कि यह कोई प्रदूषण राजनीति का मुद्दा नहीं है, बल्कि हम सब की सामुहिक जिम्मेदारी निभाने का वक्त है। आगे कहा कि हसनपुर क्षेत्र से गुजर रही समकालीन सदानीरा बगद नदी और उसके आसपास का इलाके को प्रदूषण के हवाले नहीं छोड़ा जा सकता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता चौधरी चरणसिंह ने की जबकि संचालन प्रमुख सचिव संगठन अरुण सिद्धू द्वारा किया गया।

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