नयी दिल्ली , मार्च 03 -- संसदीय कार्य मंत्रालय के सचिव निकुंज बिहारी धाल ने कहा है कि प्रत्येक निर्णय और कार्रवाई के केंद्र में नागरिक ही रहने चाहिए और शासन समर्पण, सत्यनिष्ठा और जवाबदेही से प्रेरित होना चाहिए।

संसदीय कार्य मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा "सेवा तीर्थ" में अपनी पहली बैठक में अपनाए गए "सेवा संकल्प प्रस्ताव" के अनुसरण में श्री धाल की अध्यक्षता में सोमवार को सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की एक बैठक की गयी। बैठक की शुरुआत में, "सेवा संकल्प प्रस्ताव" पढ़ा गया। इसके बाद, इसके मार्गदर्शक सिद्धांतों और मंत्रालय के जनादेश के संदर्भ में उनके कार्यान्वयन पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

संसदीय कार्य मंत्रालय के सचिव बैठक में लोक प्रशासन में "अधिकार की भावना" से "सेवा की भावना" की ओर परिवर्तन की आवश्यकता पर बल दिया । उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रत्येक निर्णय और कार्रवाई के केंद्र में नागरिक ही रहने चाहिए और शासन समर्पण, सत्यनिष्ठा और जवाबदेही से प्रेरित होना चाहिए।

उन्होंने ईमानदारी और समर्पण की भावना के साथ आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वाह करने के महत्व पर भी प्रकाश डाला और अधिकारियों को इस तरह से काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जिससे एक स्थायी संस्थागत विरासत छूट जाए।

इस दौरान विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में विभिन्न क्षेत्रों में पिछले 12 वर्षों में हासिल की गई विभिन्न उपलब्धियों पर चर्चा की गई। सरकारी विभागों में किए जा रहे विभिन्न संरचनात्मक परिवर्तनों और सुधारों पर विचार-विमर्श किया गया। चर्चा में पारदर्शिता, जवाबदेही, समयबद्ध तरीके से कार्यों का निपटान और संसदीय और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के निर्वहन में प्रभावी समन्वय को मजबूत करने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित