पटना , अप्रैल 05 -- सुप्रसिद्ध कथाकार और जनवादी लेखक संघ (जलेस), बिहार इकाई के उपाध्यक्ष और अनंत कुमार सिंह का रविवार सुबह दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उनके निधन की खबर से साहित्यकारों और प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई है।
श्री सिंह जनवादी लेखक संघ के शुरुआती दौर से ही संगठन के स्तंभ रहे थे। उन्होंने न केवल केंद्रीय कार्यकारिणी के सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं दीं, बल्कि एक अद्भुत संगठनकर्ता के रूप में भी अपनी पहचान बनाई। मानवीय संवेदनाओं और रिश्तों की गहरी समझ रखने वाले अनंत जी का कथा साहित्य हमेशा सामाजिक परिवर्तन और जनवादी मूल्यों को समर्पित रहा।
उन्होंने जनवादी मूल्यों और प्रगतिशील विचारों के प्रचार-प्रसार के लिए 'जनपथ' पत्रिका का संपादन किया, जिसे साहित्य जगत में काफी सराहा गया। उनके लेखन की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उनके पात्र प्रतिकूल परिस्थितियों में हाथ पर हाथ रखकर बैठने के बजाय बदलाव के लिए निरंतर संघर्ष करते नजर आते थे। वे एक प्रतिबद्ध लेखक थे जिन्होंने अपनी रचनाओं के जरिए समाज के वंचित और शोषित वर्ग की आवाज को मुखर किया।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित