अलवर , जनवरी 27 -- राजस्थान में अलवर में जैन धर्मावलम्बियों के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ की करीब 78 वर्ष पूर्व भूगर्भ से निकली श्याम पाषाण प्रतिमा की प्रकट तिथि पर मंगलवार को भव्य जिनवाणी समोशरण रथयात्रा निकाली गई।
रथयात्रा के दौरान रूक रूककर इन्द्रदेव भी फुहारों से तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का अभिषेक करते रहे। कार्यक्रम में महिला-पुरूष श्रद्धालुओं से लेकर बच्चों तक में ऐसा उत्साह उमड़ा कि वे करीब एक किलोमीटर लम्बी रथयात्रा में भजन करते हुए और जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। समोशरण रथयात्रा का दृश्य ऐसा रहा कि जहां पुरूष श्रद्धालुओं हाथों में समाधिस्थ दिगम्बर जैनाचार्य विद्यासागर महाराज, ज्ञान सागर महाराज के कटआउट लेकर चल रहे थे वहीं आचार्य विशुद्व सागर महाराज, सुधासागर महाराज आदि जैन गुरूओं की तस्वीरें लेकर चल रहे थे तो महिला मंडलों की महिलाएं हाथों में ध्वजाएं लेकर चल रही थी। फुहारों की परवाह किये बगैर लोग उत्साह के साथ इस रथयात्रा में शामिल रहे।
स्थानीय मन्नी का बड़ स्थित श्री दिगम्बर जैन आदिनाथ मंदिर से यह रथयात्रा सुबह करीब 10 बजे दिगम्बर जैन आर्यिका आर्षमति माताजी ससंघ के सानिध्य में शुरू हुई तो पूरा क्षेत्र भगवान आदिनाथ के जयकारों से गूंज उठा। आर्यिका संघ का श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर समिति के अध्यक्ष प्रदीप कुमार जैन गोधा, उपाध्यक्ष नरेश जैन बड़तलिया, सचिव राकेश जैन अम्बिया, कोषाध्यक्ष प्रदीप जैन, संयोजक महेश बाबू जैन सहित जैन धर्मावलम्बियों ने अगवानी की।
रथयात्रा शुरू होने के साथ ही ड्रोन रूपी हैलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा होने के नजारे ने लोगों को ज्यादा रोमांचित कर दिया। रथयात्रा के आगे पीछे पुलिस का लवाजमा भी साथ चल रहा था। मन्नी का बड़ से यह रथयात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई जब वीर चौक पर पहुंची तो वहां वीर चौक जैन व्यवसायी संघ की तरफ से रथयात्रा की अगवानी की गई और आर्यिका आर्षमति माताजी का पाद प्रक्षालन किया गया और संघ की तरफ से बच्चू सिंह जैन, अनिल जैन, शिखर चन्द जैन सहित खिल्लीमल जैन आदि ने आरती की। रथयात्रा में सबसे आगे करीब छह अश्व चल रहे थे वहीं रथयात्रा में कई झांकियां शामिल थीं जिसमें समाधिस्थ आचार्य विद्यासागर महाराज का आज समाधि दिवस होने के उपलक्ष्य में उनकी भी एक झांकी साथ चल रही थी।
इसके अलावा रथयात्रा भजन मण्डली भी आकर्षक भजनों की प्रस्तुति कर रही थी तो भजनों की तर्ज पर श्रद्वालुजन जिनेन्द्र भक्ति में डूबकर नृत्य करते हुए चल रहे थे। विभिन्न मार्गों से होते हुए ये रथयात्रा वापिस मन्नी का बड़ स्थित आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर पहुंची। कार्यक्रम में जैन समाजों, जैन समाज की विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी भी मुख्य रूप से शामिल रहे।
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