बिलासपुर , फरवरी 27 -- छत्तीसगढ़ प्रदेश की जेलों से पैरोल पर रिहा किए गए बंदियों की वापसी नहीं होने का मामला गंभीर रूप लेता जा रहा है। इस संबंध में जेल महानिदेशक द्वारा प्रस्तुत शपथपत्र में आज खुलासा हुआ है कि पैरोल पर छोड़े गए 38 बंदियों में से 37 अब तक वापस नहीं लौटे हैं, जबकि केवल एक बंदी को ही गिरफ्तार किया जा सका है। इस स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए उच्च न्यायालय ने मामले को मॉनिटरिंग के लिए सूचीबद्ध कर दिया है।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ में चल रही है। न्यायालय ने पहले ही राज्य की विभिन्न जेलों से पैरोल पर रिहा बंदियों की स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए थे। इसके अनुपालन में जेल महानिदेशक ने विस्तृत शपथपत्र प्रस्तुत कर प्रदेश की जेल संरचना और पैरोल पर छोड़े गए बंदियों की वर्तमान स्थिति की जानकारी दी।
शपथपत्र के अनुसार राज्य में पांच केन्द्रीय कारागाह रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, जगदलपुर और अंबिकापुर संचालित हैं। इनके अतिरिक्त 12 जिला जेल और 16 उपजेल कार्यरत हैं।
सुनवाई के दौरान 10 फरवरी को दायर हलफनामे में बताया गया कि कुल 38 बंदी पैरोल पर बाहर हैं। इनमें से 37 बंदी अब तक जेल प्रशासन की पकड़ से बाहर हैं, जिससे सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
उल्लेखनीय है कि कोविड-19 महामारी के दौरान संक्रमण की रोकथाम और जेलों में भीड़ कम करने के उद्देश्य से अच्छे आचरण वाले बंदियों को अस्थायी रूप से पैरोल पर रिहा किया गया था। संक्रमण की स्थिति को देखते हुए पैरोल की अवधि भी समय-समय पर बढ़ाई गई थी। हालांकि महामारी का प्रभाव कम होने के बाद भी कई बंदियों की वापसी नहीं हो पाई है।
उच्च न्यायालय द्वारा मामले की निगरानी शुरू किए जाने के बाद अब प्रशासन की जवाबदेही और कार्रवाई पर विशेष नजर रहेगी।
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