रांची , दिसम्बर 18 -- झारखंड हाईकोर्ट में पेसा कानून से संबंधित नियमावली अब तक लागू नहीं होने को लेकर दायर अवमानना याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई।
इस दौरान पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार सशरीर अदालत में उपस्थित हुए। सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ में हुई।
कोर्ट ने सचिव से स्पष्ट रूप से पूछा कि पेसा कानून से संबंधित नियमावली को अब तक कैबिनेट में प्रस्तुत किया गया है या नहीं। इस पर सचिव ने अदालत से आग्रह किया कि उन्हें इस संबंध में विस्तृत जवाब देने के लिए मंगलवार तक का समय दिया जाए। अदालत ने सचिव के आग्रह को स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई की तारीख तय की।
हालांकि, अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कड़ा संदेश भी दिया। खंडपीठ ने कहा कि यदि अगली सुनवाई तक पेसा नियमावली की स्थिति को लेकर स्पष्ट और संतोषजनक जानकारी अदालत को नहीं दी गई, तो कोर्ट कड़ा रुख अपनाने से पीछे नहीं हटेगा। कोर्ट की इस टिप्पणी को राज्य सरकार के लिए सख्त चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है।
इसके साथ ही अदालत ने पिछली सुनवाई के दौरान बालू घाटों की नीलामी के बाद अलॉटमेंट पर लगाई गई रोक को अगली सुनवाई तक बरकरार रखने का आदेश दिया। इससे राज्य में बालू खनन से जुड़े मामलों पर भी असर पड़ना तय माना जा रहा है।
यह अवमानना याचिका आदिवासी बुद्धिजीवी मंच की ओर से दायर की गई है। प्रार्थियों की ओर से वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार ने अदालत में पक्ष रखा।
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