नैनीताल , मार्च 13 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने कुमाऊं विश्वविद्यालय के पूर्व रजिस्ट्रार सुधीर बूडाकोटि को पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिये जाने के मामले में शुक्रवार को सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। इस मामले में छह सप्ताह बाद सुनवाई होगी।

याचिकाकर्ता की ओर से एक याचिका दायर कर पेंशन मामले को चुनौती दी गयी है। इस प्रकरण पर मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में सुनवाई हुई।

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि वह वर्ष 1991 में भारतीय खेल प्राधिकरण में सहायक निदेशक के पद पर नियुक्त हुआ तथा वर्ष 2009 में उन्हें कुमाऊं विश्वविद्यालय का रजिस्ट्रार पद पर नियुक्ति तैनाती दे दी गयी। आठ दिसंबर, 2009 को उन्होंने रजिस्ट्रार पद पर कार्यभार ग्रहण कर लिया।

वर्ष 2011 में उन्होंने राज्य सरकार को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि उन्हें पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिया जाये। उन्होंने कहा कि 19 जून,2013 को कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति ने एक आदेश जारी कर उन्हें पुरानी पेंशन योजना का लाभ प्रदान किया।

इस दौरान याचिकाकर्ता विभिन्न विश्वविद्यालयों में रजिस्ट्रार पद पर तैनात रहे और 30 जून, 2023 को सेवानिवृत्त हो गये। यह भी कहा गया कि उन्हें भविष्य निधि और अवकाश नकदीकरण का लाभ मिल गया है लेकिन ढाई वर्ष बीत जाने के बावजूद उन्हें पेंशन का भुगतान नहीं किया जा रहा है।

विश्वविद्यालय ने पेंशन को अवैध ढंग से रोक रखा है। जो कि भेदभावपूर्ण है। यह कार्यवाही कानून सम्मत नहीं है। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत से पेंशन का भुगतान करने की मांग की गयी है।

दूसरी ओर सरकार की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता सरकारी कर्मचारी रहा है और कुलपति को पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने का अधिकार नहीं है। इसके बाद अदालत ने सरकार से इस संबंध में छह सप्ताह में स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित