समस्तीपुर , मार्च 28 -- िहार मे समस्तीपुर जिले के पूसा स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डाँ पी.एस. पाण्डेय ने शनिवार को कहा कि कृषि वैज्ञानिकों ने पूर्वी भारत में पहली बार आईवीएफ(टेस्ट ट्यूब बेबी) तकनीक से साहीवाल बछिया को जन्म दे कर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है।

कुलपति श्री पाण्डेय ने आज यहां यूनीवार्ता से बातचीत करते हुए बताया कि डेयरी वैज्ञानिक डाँ कृष्ण मोहन कुमार के नेतृत्व मे वैज्ञानिकों की टीम ने आइवीएफ तकनीक से विश्वविद्यालय क्षेत्र के पिपराकोठी स्थित देशी नस्ल संवर्धन के उत्कृष्टता केंद्र में तीन और मोतिहारी के चकिया गौशाला में एक साहीवाल बछिया को जन्म दिला कर इतिहास रचा है।

श्री पाण्डेय ने बताया कि इस तकनीक से देसी नस्लों के विकास में अभूतपूर्व तेजी आयेगी। साथ ही यह भारत की दुग्ध उत्पादन रणनीति में एक बड़ा बदलाव है। उन्होंने बताया कि अब जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशील विदेशी नस्लों की जगह उच्च उत्पादकता वाली स्वदेशी नस्लों पर जोर दिया जा रहा है।

कुलपति डॉ पाण्डेय ने बताया कि पिछले कुछ दशकों से दूध उत्पादन के लिए किसान विदेशी नस्लों पर ही निर्भर रहे हैं, लेकिन विदेशी नस्ल की गायों में कई समस्यायें देखने को मिल रही हैं। होलस्टीन फ्रेसियन (एचएफ) और जर्सी नस्लें भारत में अधिक बीमार होती हैं और उनके गर्भधारण में भी काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जबकि देशी नस्ल भारत के जलवायु के अनुकूल है और उनमे विदेशी नस्लों के बराबर दूध देने की क्षमता है।

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