(संजय कौशिक से)मोतिहारी , मार्च 29 -- बिहार में पूर्वी चंपारण जिले से गुजरने वाली 'एक्सप्रेस-वे' पर रफ्तार का जुनून जिंदगी पर भारी पड़ रहा है और पिछले 09 वर्षों में होने वाली 3192 की मौतें इस बात की गवाह हैं।

इस जिले में "सड़क दुर्घटनाओं" के हालिया आंकड़ें ह्रदय विदारक हैं। वर्ष 2025 में जिले ने अपने ही पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए सड़क दुर्घटनाओं में हुई मौतों ने 28% की भारी वृद्धि दर्ज की है। गुजरे एक वर्ष में प्रत्येक 2 दिनों में औसतन 3 लोगों की किसी न किसी सड़क पर जान जाती रही है। सड़क हादसों के राष्ट्रीय रिकार्ड के अनुसार देश के सबसे अधिक सड़क दुर्घटना वाले सौ जिलों की सूची में पूर्वी चंपारण का शामिल होना आंकडों की भयावहता को रेखांकित करता है।

सड़क हादसों की देशव्यापी सूचि में बिहार 15 वें और मौतों के मामले में 10 वें स्थान पर है, जबकि बिहार के 6 सर्वाधिक दुर्घटना वाले जिलों की सूची में पटना, मुजफ्फरपुर, सारण (छपरा), गया और नालंदा के साथ पूर्वी चम्पारण शामिल है। वाहनों की तेज रफ़़्तार में रोज यहां किसी न किसी की जिंदगी काल के मुख में समा जाती है।

पूर्वी चंपारण में 2017 से 2025 के बीच महज 9 वर्षों में हुई 3978 सड़क दुर्घटनाओं में 3192 लोगों की जान चली गयी और 2290 लोग मौत से संधर्ष में जीत हासिल कर अपनी घर वापसी करने में कामयाब रहे। बहुत से लोगों की जीवन भर की पूँजी इलाज में चली गयी और कुछ अपंग हो कर घर लौट पाए। इन हादसों के जिम्मेवार मुख्य कारको में तेज रफ़्तार, सुरक्षा मानकों की अनदेखी, चौक-चौराहों पर अनियंत्रित परिचालन, गलत लेन में वाहन संचालन और वाहन चलाने के दौरान मोबाइल का इस्तेमाल की मुख्य भूमिकाएं रहीं।

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