मोतिहारी , दिसम्बर 27 -- भारत-नेपाल का सीमाई जिला पूर्वी चंपारण नशे और मादकता के कारोबार का द्वार बनकर उभरा है,जहाँ से लगातार बढ़ रहे मादक पदार्थों की तस्करी के चलते शौक जरूरत बन रही है, जरूरत कुंठा में तब्दील हो रही है और इसका शिकार सीमा पर स्थित इलाकों के नौजवान हो रहे हैं।
महात्मा गांधी को "महात्मा" बनाने वाले सत्याग्रह की भूमि पूर्वी चम्पारण जिले में विगत एक वर्ष के नशे के कारोबार से जुड़े आंकड़े काफी भयावह हैं। 01 जनवरी 2025 से 25 दिसम्बर 2025 के बीच केवल पूर्वी चंपारण में 30 करोड़ से अधिक कीमत के मादक पदार्थ पकड़े गए हैं। इस अवधि में 4590.475 किलो गांजा, 47.402 किलो चरस, 38.619 किलो स्मैक, 12.22 किलो अफीम, 0.076 ग्राम हशीश और 0.05 ग्राम हेरोईन के साथ दर्जनों लोगों को गिरफ़्तार किया गया। गिरफ्तार लोगों में बिहार के अतिरिक्त उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, झारखंड, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के निवासी भी शामिल हैं। हालात इतने डरावने हैं कि केंद्रीय गृहराज्यमंत्री नित्यानन्द राय ने भी 13 दिसम्बर 2025 को एसएसबी के एक कार्यक्रम के दौरान रक्सौल में स्वीकार किया कि विदेशी शक्तियां जानती हैं कि अस्त्र-शस्त्र और विचार-व्यवहार से वे भारत से नहीं जीत सकती। इसलिए ऐसी शक्तियां मादक पदार्थों को भारत में भेजकर युवा पीढ़ी को बर्बाद करने और देश को कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं।
पूर्वी चम्पारण से सटे सीमावर्ती इलाकों में इस नशे के कारोबार के चलते युवाओं के डगमगाते पांव, अधखुली आंखें, मदहोश तन-मन और बदहवासी साफ दिख जाती है। आखिर इस चलचित्र, कथानक को कौन लिख रहा है, कहीं यह किसी अंतराष्ट्रीय साजिश का अघोषित रूप तो नही है, यहाँ तक कि शासन भी ऐसे षड्यंत्र से इंकार नही करता है।
इस जिले में शराब से सरक कर जवानी गांजा, अफीम, चरस और ब्राउन सुगर की गिरफ़्त में आने लगी है। विद्यालय से महाविद्यालय तक पसरा हुआ है नशे का कारोबार। पिछले एक वर्ष में अकेले पूर्वी चंपारण में सौ से अधिक छोटे-बड़े ऐसे मामले पकड़ में आये हैं, जो युवा पीढ़ी को बीमार बनाने की अंतराष्ट्रीय साजिश का खुलासा करते हैं। सभी मामलों में प्रतिबंधित मादक पदार्थ नेपाल से सीमा पार कर भारतीय क्षेत्र में लाये गए थे।
इसका संबंध में चंपारण क्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) हरिकिशोर राय का मानना है कि " बड़े मुनाफे के कारण नशा के कारोबार का आकर्षण बढ़ा है। लेकिन पुलिस की विशेष नज़र है। लोग पकड़े भी जा रहे हैं और उन्हें सजा भी मिल रही है।"पूर्वी चंपारण में 2025 के दिसंबर माह में ही महज 26 दिनों में 13 मादक पदार्थों से जुड़े मामले पकड़ में आए हैं। उदाहरण के लिए 01 दिसम्बर 2025 को चिरैया थाना की पुलिस ने एक नेपाली महिला को 3.542 किलो चरस के साथ गिरफ्तार किया। 6 दिसम्बर की रात पुलिस ने छतौनी थानाक्षेत्र के मठिया मोड़ से एक स्कार्पियो गाड़ी से 169 किलो गांजा के साथ दो लोगों को गिरफ्तार किया। 07 दिसंबर रक्सौल कस्टम के समीप और सुगांव माई स्थान के पास से 9.178 किलो चरस बरामद कर दो वाहनों को जब्त करने के साथ 06 लोगों को गिरफ्तार किया। उसी दिन पुलिस ने हरसिद्धि थानाक्षेत्र से 2.88 किलो गांजा के साथ एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। 12 दिसंबर की रात जीतना थाना के धेनुखी बलुआ सरेह से सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने 36 किलो गांजा बरामद किया। 13 दिसंबर नकरदेई थाना की पुलिस ने भकुरहियां गांव से एक व्यक्ति को 26 ग्राम चरस के साथ गिरफ्तार किया। 14 दिसंबर आदापुर थाने की पुलिस और एसएसबी ने संयुक्त रूप से भारत-नेपाल सीमा के समीप से 6 किलो चरस बरामद किया। 15 दिसंबर को हरपुर थाने की पुलिस और एसएसबी ने संयुक्त रूप से 1.35 किलो अफीम और 52 ग्राम चरस के साथ उत्तरप्रदेश के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। 16 दिसंबर की रात जीतना थाने की पुलिस ने जीतना गांव के समीप से 71 किलो गांजा बरामद किया। 17 दिसंबर को पुलिस ने हरैया थाने के भलुआहा गांव से 01 किलो चरस बरामद किया। 24 दिसंबर को पुलिस ने हरैया थाने के पनटोका मार्ग से 7.560 किलो चरस के साथ तीन तस्करों को गिरफ्तार किया। 26 दिसंबर को सुगौली थाने के श्रीपुर चौक के पास एक चारपहिया वाहन से पुलिस ने 93 किलो गांजा के साथ 3 व्यक्ति को गिरफ्तार किया है।
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