जयपुर , फरवरी 05 -- राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जनकल्याण को राज्य सरकार का एकमात्र ध्येय गुरुवार को कहा कि उनकी सरकार सबका साथ, सबका विकास के मूलमंत्र पर प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही हैं और राज्य में अर्थव्यवस्था को स्थिरता के साथ गति और दिशा दी गई हैं जबकि पूर्ववर्ती सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन से प्रदेश का खजाना खाली हो गया था।

श्री शर्मा गुरुवार को विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर हुई बहस का जवाब दे रहे थे। उन्होंने इस दौरान पानी-बिजली, शिक्षा, चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाओं में गत दो वर्ष की उपलब्धियों को विस्तार से रेखांकित किया। उन्होंने रामजल सेतु लिंक परियोजना, यमुना जल समझौता, देवास परियोजना एवं माही-बांसवाड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र और भारत की यूरोपियन यूनियन और अमेरिका के साथ ट्रेड डील्स के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने राज्य सरकार की दो वर्ष की उपलब्धियों का दस्तावेज सदन के पटल पर रखा जोकि पहली बार हुआ है।

मुख्यमंत्री ने खेजडी को राजस्थान का कल्पवृक्ष और राजस्थान की पहचान बताते हुए कहा कि इसकी बढते हुए रेगिस्तान को रोकने में हमेशा सार्थक भूमिका रही है। राज्य सरकार विकास और विरासत दोनों को संजोने का कार्य कर रही है। हम राज्य के कल्पवृक्ष खेजड़ी को बचाने के लिए कानून भी लाएंगे, जिससे प्रदेश में खेजड़ी संरक्षित रहे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान से प्रेरित होकर राज्य सरकार ने वृक्षारोपण का महाअभियान चलाया और केवल दो वर्षों में 20 करोड़ पौधे लगाए। हमने लक्ष्य तय किया है कि पांच वर्षों में 50 करोड़ से अधिक पौधे लगाएंगे।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व में हमारे देश ने विकास, विश्वास और आत्मसम्मान का एक नया इतिहास रचा है। देश की अर्थव्यवस्था जो 2014 में दुनिया में 11 वें स्थान पर थी। प्रधानमंत्री के सफल प्रयासों, ठोस निर्णयों एवं कुशल नेतृत्व से चौथे स्थान पर पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन एवं जापान की अर्थव्यवस्था को भी पछाड़कर हमारी अर्थव्यवस्था 4.18 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार करते हुए दुनिया की सबसे तेज रफ्तार से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन गई है।

श्री शर्मा ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के समय वित्तीय कुप्रबंधन ने ऐसा हाल कर दिया था कि खजाना खाली, योजनाएं अधूरी और भरोसा टूटा हुआ था। पिछली सरकार ने हमें विरासत में 5 लाख 79 हजार 781 करोड़ रुपये का कर्ज दिया था। बडे़ राज्यों की श्रेणी में पंजाब के बाद राजस्थान के ऊपर सर्वाधिक कर्ज था। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में हमारी सरकार के आर्थिक प्रबंधन, सामाजिक स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचारों, बेस्ट प्रैक्टिसेज और प्रशासनिक सुधारों को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2023-24 में जो राजस्व घाटा 38 हजार 954 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था उसे 2025-26 के बजट अनुमानों में 31 हजार 9 करोड़ रुपये रहने की संभावना व्यक्त की गई है। हमारी सरकार 2 साल में ही राजस्व घाटे को करीब 8 हजार करोड़ रूपये कम करने में सफल रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे कुशल वित्तीय प्रबंधन से महंगाई पर लगाम लगी है और आम आदमी को राहत मिली है। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार में वर्ष 2020-21 से 2023-24 तक केन्द्र सरकार से 15 हजार 803 करोड़ रुपये की राशि पूंजीगत निवेश सहायता के रूप में राजस्थान को प्राप्त हुई थी। लेकिन जब डबल इंजन सरकार बनी, तो रफ्तार भी डबल हो गई। हम दो साल में ही 19 हजार करोड़ रुपये से अधिक की पूंजीगत निवेश सहायता केन्द्र सरकार से लेकर आए हैं तथा आगामी वित्तीय वर्ष में भी 2 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त पूंजीगत निवेश सहायता केन्द्र से प्रदेश को मिलने जा रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024-25 में 30 हजार 700 करोड़ रुपए से अधिक का पूंजीगत व्यय हुआ है, जो इतिहास में अब तक का सबसे अधिक है। प्रदेश को इस वित्त वर्ष में केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के रूप में 90 हजार 445 करोड़ रुपये मिलेंगे। यह पिछले वर्ष से करीब 6 हजार 505 करोड़ रुपये अधिक है।

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