पूर्णिया , अप्रैल 25 -- बिहार में पूर्णिया के नगर आयुक्त कुमार मंगलम ने बताया कि पूर्णिया को 11 सैटेलाइट टाउनशिप में शामिल किया जाना जिले के लिए बड़ी उपलब्धि है।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पहली कैबिनेट बैठक में लिए गए 11 नए टाउनशिप बसाने के फैसले के तहत पूर्णिया को भी सैटेलाइट टाउनशिप के रूप में विकसित किया जाएगा। इसे लेकर जिले में चिन्हित क्षेत्रों की जमीन की खरीद-बिक्री और निर्माण गतिविधियों पर अस्थायी रोक लगा दी गई है।

नगर आयुक्त कुमार मंगलम ने इस संबंध में बताया कि पूर्णिया को 11 सैटेलाइट टाउनशिप में शामिल किया जाना जिले के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत पूर्णिया को कोर एरिया और स्पेशल एरिया में विकसित किया जाएगा। कोर एरिया के लिए परोरा और उसके आसपास करीब 800 से 900 एकड़ भूमि का प्रस्ताव भेजा गया है, जिसे योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा।उन्होंने बताया कि आने वाले समय में सरकार की गाइडलाइन के अनुसार विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा। साथ ही पूर्णिया में एरोसिटी बनाने की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है, जिससे विकास की गति कई गुना बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

सब-रजिस्ट्रार उमाशंकर मिश्र ने बताया कि टाउनशिप निर्माण के लिए जिले के 53 मौजों की जमीन को चिन्हित किया गया है। नगर विकास एवं आवास विभाग की ओर से जारी संकल्प के अनुसार इन क्षेत्रों को कोर और विशेष क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसमें करीब 1374 एकड़ भूमि को कोर एरिया और लगभग 26,000 एकड़ को विशेष क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है।उन्होंने स्पष्ट किया कि इन चिन्हित क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री और विकास कार्यों पर 30 मार्च 2027 तक रोक लगाई गई है। हालांकि, 53 मौजों के बाहर जिले के अन्य क्षेत्रों में जमीन की रजिस्ट्री पूर्व की तरह जारी रहेगी। पूर्णिया में कुल चार रजिस्ट्री कार्यालय हैं, जहां अन्य क्षेत्रों में खरीद-बिक्री प्रभावित नहीं होगी।

सब-रजिस्ट्रार ने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल चिन्हित मौजों में ही प्रतिबंध लागू है। शहरी क्षेत्र का कोई हिस्सा कोर या विशेष क्षेत्र में शामिल नहीं है, इसलिए वहां सामान्य गतिविधियां जारी रहेंगी।

वहीं, स्थानीय निवासी अरुण कुमार ने सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे क्षेत्र में तेजी से विकास होगा। उन्होंने कहा कि टाउनशिप बनने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बाहरी निवेश आएगा और किसानों की जमीन का मूल्य भी बढ़ेगा।

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