चेन्नई , मार्च 08 -- तमिलनाडु के दक्षिणी जिले शिवगंगा के मानामदुरई में हमले के मामले में गिरफ्तार दो आरोपियों में से एक की मौत रविवार को पुलिस स्टेशन ले जाते समय हो गयी।

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया और विपक्षी दलों ने भी इसकी कड़ी निंदा की है। विपक्षी दलों का आरोप है कि यह पुलिसिया यातना के कारण हिरासत में हुई मौत का मामला है।

वहीं पुलिस सूत्रों ने बताया कि आरोपी आकाश डेलिसन की मौत सांस लेने में तकलीफ के कारण हुई। उसे उसके टूटे हुए पैर के इलाज के बाद मदुरई जेल ले जाया जा रहा था। पुलिस के मुताबिक, आकाश का पैर तब टूटा था, जब उसने पुलिस की पकड़ से भागने की कोशिश में पुल से छलांग लगा दी थी।

पुलिस ने बताया कि पांच मार्च की रात दो दोस्त, जयकुमार (37) और अलगार (36) काम से घर लौट रहे थे, तभी मोटरसाइकिल सवार तीन बदमाशों के गिरोह ने उन पर तलवार और दरांती जैसे घातक हथियारों से हमला कर दिया, जिसमें दोनों को गंभीर चोटें आयीं और उन्हें इलाज के लिए शिवगंगा के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया।इस बीच इलाके के सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद पुलिस ने उनमें से दो आरोपियों गुणा और आकाश को गिरफ्तार कर लिया, जबकि हमले में शामिल तीसरे आरोपी की तलाश के लिए कोशिशें जारी हैं।

पुलिस के मुताबिक, जब दोनों को थाने ले जाया जा रहा था, तब आकाश ने पुलिस से भागने के लिए पुल से छलांग लगा दी, जिससे उसके पैर में फ्रैक्चर हो गया। इसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पुलिस ने बताया कि जब उसे मदुरई जेल ले जाया जा रहा था, तब उसकी सेहत बिगड़ गयी और उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगी। उसे फौरन अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के बावजूद उसकी मौत हो गयी।

आकाश के परिवार वालों और स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि उसकी मौत पुलिस यातना से हुई है। इससे इलाके में तनाव पैदा हो गया। उन्होंने 'रोड रोको' प्रदर्शन भी किया, पुलिस के खिलाफ नारे लगाये और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई व मृतक के लिए इंसाफ की मांग की।

पुलिस के खिलाफ आकाश के रिश्तेदारों के चक्का जाम के कारण मदुरई-रामेश्वरम रोड पर यातायात काफी देर तक बाधित रहा। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए इलाके में बड़ी तादाद में पुलिस बल तैनात किया गया है।

इस बीच अन्नाद्रमुक और उसके सहयोगी पूर्व केंद्रीय मंत्री अंबुमणि रामदास वाली पीएमके समेत विपक्षी दलों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह हिरासत में हुई मौत है और कुदरती बताकर पुलिस दबाने की कोशिश कर रही है। इसके साथ ही उन्होंने मृतक के परिवार के लिए उचित मुआवजे की मांग भी की।

यहां जारी एक बयान में डॉ. अंबुमणि ने कहा कि पुलिसिया यातना के कारण मौत का यह 27वां मामला है।

उन्होंने कहा कि आकाश से पूछताछ के लिए मानामदुरई पुलिस स्टेशन ले जाया गया था। उसे गिरफ्तारी और तफ्तीश के नाम पर प्रताड़ित किया गया और उसकी हत्या कर दी गयी। उन्होंने कहा कि यह बेहद निंदनीय है कि द्रमुक सरकार और पुलिस इंसानी जान और मानवाधिकारों का रत्ती भर भी सम्मान किये बिना काम कर रही है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मानामदुरई में हुए छठे घातक हमले के सिलसिले में आकाश समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था। कुछ घंटों बाद आकाश को टूटे पैर के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया।

उन्होंने आरोप लगाया, "पुलिस यह कहानी गढ़ रही है कि अस्पताल में इलाज के बाद ठीक होने और मदुरई जेल ले जाये जाने के दौरान आकाश को अचानक सांस लेने में तकलीफ हुई और उसकी मौत हो गयी।" वहीं आकाश के परिवार का आरोप है कि गिरफ्तारी के वक्त से लेकर उसकी मौत तक उसे पुलिस स्टेशन ले जाया ही नहीं गया, बल्कि पुलिस ने किसी गुप्त जगह पर उसे प्रताड़ित किया और उसकी हत्या कर दी।

उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में अपराधों को रोकने के बजाय सरकार और पुलिस जनता के सरकार-विरोधी गुस्से को भटकाने के लिए कैदियों को गोली मारने और उनके पैर तोड़ने जैसे हथकंडे अपनाती है। मामलों की सही तरीके से जांच करने और दोषियों को सजा दिलाने के बजाय द्रमुक शासन में कैदियों को तड़पाने और उन्हें जान से मारने का चलन बढ़ रहा है।पिछले साल शिवगंगा जिले के तिरुप्पुवनम पुलिस स्टेशन में माडापुरम अजीतकुमार की पीट-पीटकर की गयी हत्या का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अब मानामदुरई में आकाश की हत्या कर दी गयी है।

उन्होंने कहा, "अब तक द्रमुक शासन में पुलिस थानों में मौत के 27 मामले सामने आ चुके हैं।" उन्होंने मांग की कि आकाश के साथ ज्यादती करने और उसकी हत्या के लिए जिम्मेदार सभी पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तार कर सजा दी जाए और मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।

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