बैतूल , जनवरी 05 -- मध्यप्रदेश में भावांतर भुगतान योजना के अंतर्गत पुराने सोयाबीन की बिक्री पर किसानों को योजना का लाभ नहीं मिलेगा।

शासन ने इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए मंडी स्तर पर सख्ती बढ़ा दी है। निर्देशों के अनुसार यदि कोई किसान पुराने सोयाबीन को भावांतर योजना के तहत बेचने का प्रयास करता है, तो उसे योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा। शासन ने मंडी कर्मचारियों को गेट स्तर पर ही सोयाबीन की पहचान करने की जिम्मेदारी सौंपी है। किसानों से उपज संबंधी आवश्यक जानकारी ली जाएगी। जांच में यदि सोयाबीन पुराना पाया गया तो उसकी प्रवेश पर्ची भावांतर के बजाय गैर-भावांतर श्रेणी में जारी की जाएगी। नीलामी के दौरान भी पुराने सोयाबीन को भावांतर योजना में शामिल नहीं किया जाएगा। नियमों के उल्लंघन पर संबंधित कर्मचारियों व व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

सूत्रों के अनुसार शासन के संज्ञान में आया है कि कुछ लोग भावांतर योजना में पंजीयन कराकर पुराने सोयाबीन को बेचने का प्रयास कर रहे थे। साथ ही बिचौलिये और फड़िये छोटे किसानों से थोड़ी-थोड़ी मात्रा में सोयाबीन खरीदकर अन्य किसानों के नाम पर मंडी में बेचकर योजना का दुरुपयोग कर रहे थे। इसी को रोकने के लिए मंडी सचिवों को कड़ी निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।

शासन ने स्पष्ट किया है कि भावांतर भुगतान योजना का लाभ केवल चालू वर्ष के नए सोयाबीन पर ही मिलेगा। किसानों से अपील की गई है कि वे नियमों के तहत ही उपज की बिक्री करें, ताकि वास्तविक किसानों को योजना का पूरा लाभ मिल सके।

इधर बैतूल मंडी क्षेत्र के किसानों के लिए राहत की खबर है। सोयाबीन के दाम 5 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। कृषि उपज मंडी समिति बैतूल के अनुसार गुणवत्तायुक्त सोयाबीन पर किसानों को बेहतर भाव मिल रहा है। किसानों से अपील की गई है कि वे पूरी तरह सुखाई और साफ उपज ही मंडी में लाएं।

बैतूल कृषि मंडी के सचिव सुरेश कुमार परते ने बताया कि शासन के नए आदेश के तहत पुरानी सोयाबीन पर भावांतर योजना का लाभ नहीं मिलेगा। उल्लंघन पर कार्रवाई की जाएगी।

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