पटियाला , दिसंबर 13 -- पंजाब स्टेट पॉवर कॉरपोरेशन लिलिटेड (पीएसपीसीएल) सभी यूनियनों ने बिजली क्षेत्र की जमीन और संपत्तियों की बिक्री, रोपड़ में 800 मेगावाट की दो इकाइयों की प्रक्रिया में पैदा की जा रही बाधाओं, केंद्र सरकार द्वारा लागू की गयीं चार नयी श्रम संहिताओं और मसौदा विद्युत संशोधन विधेयक 2025 के प्रावधानों के खिलाफ एक संयुक्त विरोध आंदोलन शुरू करने का फैसला किया है।

उन्होंने सर्वसम्मति से पंजाब सरकार से इन प्रस्तावों को तत्काल वापस लेने का आह्वान किया।

पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव अजय पाल सिंह अटवाल ने शनिवार को बताया कि पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन, एम्प्लॉइज जॉइंट फोरम, बिजली मूलजम एकता मंच, बिजली मूलजम नगरशील मोर्चा, काउंसिल ऑफ जूनियर इंजीनियर्स, एसोसिएशन ऑफ जूनियर इंजीनियर्स, आईटी ऑफिसर्स एसोसिएशन, ऑफिसर्स अकाउंट्स एसोसिएशन, पावरकॉम पेंशन यूनियन, पेंशनर्स एसोसिएशन, पेंशनर वेलफेयर फेडरेशन और ग्रिड सबस्टेशन एम्प्लॉई यूनियन की संयुक्त बैठक में राज्य के विद्युत क्षेत्र के सामने आ रही समस्याओं पर विचार-विमर्श किया गया। संयुक्त किसान मोर्चा से डॉ. दर्शन पाल और अंग्रेज सिंह डकौंदा भी बैठक में उपस्थित थे।

श्री अटवाल ने कहा कि विद्युत संशोधन विधेयक, 2025 पंजाब के विद्युत क्षेत्र के सार्वजनिक स्वामित्व, उपभोक्ता हितों और दीर्घकालिक स्थिरता पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। उन्होंने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि मूल्यवान पीएसपीसीएल/ पीएसटीसीएल भूमि की बिक्री से सबस्टेशन, पारेषण गलियारों और विद्युत परियोजनाओं जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के भविष्य के विस्तार पर गंभीर रूप से असर पड़ेगा।

उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि ड्राफ्ट इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2025 संघीय ढांचे को कमजोर करता है, राज्य की यूटिलिटीज़ को कमजोर करता है, और पंजाब की आम जनता और कृषि क्षेत्र के लिए बिजली की किफायती कीमत और विश्वसनीयता को खतरे में डालता है। उन्होंने रोपड़ में राज्य क्षेत्र की 800 मेगावाट की दो इकाइयों में तोड़फोड़ के प्रयासों की निंदा की, क्योंकि ये अत्यंत महत्वपूर्ण इकाइयां राज्य को विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करेंगी। यह निर्णय लिया गया कि संयुक्त विद्युत संगठन द्वारा आयोजित बैठक में विद्युत क्षेत्र के यूनियन नेता भाग लेंगे।

किसान मोर्चा आज चंडीगढ़ में और साथ ही राष्ट्रीय विद्युत कर्मचारी एवं अभियंता समन्वय समिति (एनसीसीओईई) द्वारा रविवार को नयी दिल्ली में बुलायी गयी, राष्ट्रीय स्तर की बैठक में भी भाग लेगा। नेतृत्व ने यह स्पष्ट चेतावनी भी जारी की कि बिजली क्षेत्र की संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने या उनमें सेंध लगाने का कोई भी प्रयास सभी यूनियनों द्वारा तत्काल और राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन का कारण बनेगा।

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