पटियाला , अप्रैल 25 -- पंजाब राज बिजली बोर्ड इंजीनियर्स एसोसिएशन (पीएसईबीईए) की आम सभा की बैठक में पंजाब के बिजली क्षेत्र में बढ़ते राजनीतिक दखल और प्रबंधन की कथित मनमानी कार्रवाइयों की कड़ी निंदा की गयी।

बैठक में बिजली क्षेत्र की स्थिरता, विश्वसनीयता और पेशेवर स्वायत्तता पर गंभीर चिंता जतायी गयी। एसोसिएशन के महासचिव अजयपाल सिंह अटवाल ने शनिवार को बताया कि बैठक में 800 से अधिक सेवारत इंजीनियरों ने भाग लिया, जिनमें पीएसपीसीएल, पीएसटीसीएल और भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड के मुख्य अभियंताओं से लेकर सहायक अभियंता तक शामिल थे।

बैठक में पद्मजीत सिंह, जतिंदर गर्ग, रविंदर खन्ना, जी.एस. खैरा, शमिंदर सिद्धू और हरीश शर्मा सहित कई वरिष्ठ इंजीनियरों ने दोहराया कि इंजीनियर राज्य के लोगों को निर्बाध और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति देने केलिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन गैर-तकनीकी और राजनीतिक रूप से प्रेरित फैसलों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। एसोसिएशन के अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि बिजली क्षेत्र में स्थिरता बहाल की जाये और पेशेवर स्वायत्तता सुनिश्चित की जाये। बैठक में हालिया फैसलों की सर्वसम्मति से निंदाकी गयी, जिनसे तकनीकी अखंडता, पेशेवर गरिमा और संस्थागत प्रक्रियाओं को नुकसान पहुंचने की बात कही गयी। इंजीनियरों ने चेतावनी दी कि ऐसी कार्रवाइयों से मुख्यमंत्री के "ज़ीरो पावर आउटेज" विज़न पर असर पड़ सकता है और दीर्घकालिक बिजली आपूर्ति खतरे में पड़ सकती है।

इंजीनियरों ने रोपड़ स्थित गुरु गोबिंद सिंह सुपर थर्मल प्लांट की दो 800 मेगावाट की इकाइयों में आ रही बाधाओं पर चिंता जतायी और बिजली क्षेत्र की संपत्तियों की बिक्री के प्रयासों का कड़ा विरोध किया। साथ ही, प्रस्तावित 'बिजली संशोधन विधेयक, 2025' को उपभोक्ता-विरोधी बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की गयी। बैठक में नये भर्ती सहायक अभियंताओं को कम शुरुआती वेतन दिये जाने को गंभीर अन्याय करार दिया गया और इसे ठीक करने का संकल्प लिया गया। इसके अलावा, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने और नये कर्मचारियों को पूर्ण वेतनमान देने की भी मांग उठायी गयी। सभी वक्ताओं ने एकजुटता दिखाते हुए पंजाब के बिजली क्षेत्र की सुरक्षा और स्वायत्तता बनाये रखने के लिए मिलकर संघर्ष करने का संकल्प लिया। उन्होंने सार्वजनिक संपत्तियों की बिक्री, त्रिपक्षीय समझौते के उल्लंघन और किसी भी प्रकार के राजनीतिक हस्तक्षेपको सिरे से खारिज कर दिया।

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