छत्रपति संभाजीनगर , दिसंबर 10 -- महाराष्ट्र में छत्रपति संभाजीनगर की स्थानीय अदालत ने एक प्रोफेसर के बेटे को अपने पिता की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई है जबकि अपराध करते समय वह नाबालिग था।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इसमें शामिल क्रूरता और पहले से सोची-समझी योजना के कारण उसे बालिग के तौर पर मुकदमा चलाने का फैसला सही था।

छत्रपति संभाजीनगर के मौलाना आजाद कॉलेज में अंग्रेजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजन शिंदे की अक्टूबर 2021 में उस समय हत्या कर दी गई थी, जब कुछ घंटे पहले ही उनके और उनके बेटे के बीच तीखी बहस हुई थी। मुकदमे के दौरान पेश किए गए मामले के विवरण के अनुसार यह घटना पिता और बेटे के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव के बाद हुई। अदालत के सामने पेश किए गए सबूतों से पता चला कि आरोपी को बार-बार अपमान और मौखिक दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा था, कथित तौर पर उसे अपमानजनक टिप्पणियों और सार्वजनिक अपमान का शिकार होना पड़ा था। बताया जाता है कि घटना से पहले के दिनों में पिता और बेटे के बीच बातचीत बंद थी, और उनके बीच अक्सर झगड़े होते रहते थे। दस अक्टूबर- 2021 की रात को उनके बीच तीखी बहस जारी रही। इस दौरान प्रोफेसर शिंदे ने कथित तौर पर अपने बेटे से कहा, "या तो तुम ज़िंदा रहोगे, या मैं ज़िंदा रहूंगा।" अदालत को बताया गया कि आरोपी ने दावा किया कि इस झगड़े के बाद उसे अपनी सुरक्षा का डर था। उसी रात जब प्रोफेसर हॉल में सो रहे थे, आरोपी ने उन पर हमला किया और डंबल से उनके सिर पर कई बार वार किया जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। जांचकर्ताओं ने पाया कि आरोपी ने अपराध की योजना पहले से बना रखी थी। पुलिस ने बताया कि उसने हत्या के तरीकों और सबूतों को नष्ट करने के तरीकों का अध्ययन करने के लिए अपराध पर आधारित वेब सीरीज़ और फिल्में देखी थीं। बताया जाता है कि उसने देखी गई सामग्री से नोट्स बनाए थे और कोई डिजिटल निशान न छोड़ने के इरादे से सर्च करने के लिए टोर ब्राउज़र का इस्तेमाल किया था।

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