हैदराबाद , दिसंबर 30 -- तेलंगाना में पिछड़ा वर्ग अधिकार प्राप्ति समिति के महासचिव धनुंजय नायडू ने छात्रों से सामाजिक न्याय की लड़ाई में निर्णायक भूमिका निभाने की अपील करते हुए आनुपातिक अधिकार प्राप्त करने के लिए निरंतर आंदोलनों की तैयारी करने का आग्रह किया।
श्री नायडू ने मंगलवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में सवाल उठाया कि आधिकारिक रूप से जनसंख्या का 56 प्रतिशत हिस्से में शामिल पिछड़ा वर्ग के लोग विधानमंडलों, शिक्षा और कर्मचारी पदोन्नतियों में उसी अनुपात में न्याय प्राप्त कर रहे हैं? उन्होंने कहा कि पिछली पीढ़ियों को अवसरों से वंचित होने के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ा था, हालांकि अब राज्य और देश भर में पहचान-आधारित आंदोलन गति पकड़ रहे हैं।
तेलंगाना राज्य आंदोलन में छात्रों की महत्वपूर्ण भूमिका को याद करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य ही छात्रों के बलिदानों की नींव पर बना है। आज के छात्रों से उस विरासत को समझने का आग्रह करते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि अत्यधिक बलिदान से बचना चाहिए और संगठित, लोकतांत्रिक आंदोलनों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने दावा किया कि अब बीसी के लिए राजनीतिक आरक्षण प्राप्त करने का समय आ गया है, साथ ही शिक्षा, रोजगार और आजीविका क्षेत्रों में आनुपातिक प्रतिनिधित्व भी।
श्री नायडू ने इंगित किया कि कई पिछड़ा वर्ग छात्र वित्तीय बाधाओं, कॉर्पोरेट शिक्षा का खर्च वहन न कर पाने और सरकारी समर्थन की अपर्याप्तता के कारण पीछे रह जाते हैं। उन्होंने उन राजनीतिक दलों की आलोचना की जो पिछड़ा वोट मांगते समय राजनीतिक आरक्षण का वादा करते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद उसे पूरा नहीं करते।
राजनीतिक दृढ़ता की अपील करते हुए उन्होंने पिछड़ों से आगामी एमपीटीसी, जेडपीटीसी और नगरपालिका चुनावों में सभी सामान्य सीटों पर चुनाव लड़ने का आह्वान किया और कहा कि तेलंगाना भर में स्थानीय निकायों में बीसी को कम से कम 56 प्रतिशत प्रतिनिधित्व प्राप्त करने का लक्ष्य रखना चाहिए। उन्होंने सभी पिछड़े संगठनों से एकजुट होकर आगे बढ़ने और छात्रों तथा युवाओं से राजनीति में प्रवेश करके भ्रष्टाचार-मुक्त एवं नैतिक प्रशासन बनाने में मदद करने की अपील की।
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