दंतेवाड़ा , दिसंबर 13 -- छत्तीसगढ के दंतेवाड़ा में जिला एवं सत्र न्यायालय दंतेवाड़ा में लंबित एक पारिवारिक विवाद का सुखद अंत सामने आया, जहां आपसी समझौते के माध्यम से दाम्पत्य जीवन को पुनः स्थापित किया गया। व्यवहार वाद क्रमांक 53-ए/2025 में वादी नागेन्द्र एवं प्रतिवादिनी रीमा (दोनों नाम परिवर्तित) ने बिना किसी दबाव के स्वेच्छा से पारिवारिक राजीनामा करते हुए साथ रहने पर सहमति व्यक्त की।
जिला पीआरओ ने शनिवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी करके बताया कि उल्लेखनीय है कि पूर्व में वादी द्वारा हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 13(1)(क) के तहत क्रूरता के आधार पर विवाह विच्छेद की याचिका न्यायालय में प्रस्तुत की गई थी। दंपती के दो संतान हैं, जिनमें लगभग 19 वर्षीय पुत्री और 15 वर्षीय पुत्र शामिल हैं। पारिवारिक विवाद के चलते बच्चों के भविष्य पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए न्यायालय द्वारा समझाइश की प्रक्रिया अपनाई गई।
न्यायालय की खंडपीठ क्रमांक-2 के सदस्य एन. के. साहू (अधिवक्ता) एवं पवन शर्मा (सामाजिक कार्यकर्ता) तथा पीठासीन अधिकारी हरीश कुमार अवस्थी ने दंपती को आपसी संवाद, सहनशीलता और पारिवारिक जिम्मेदारियों का महत्व समझाया। बच्चों के समग्र विकास में माता-पिता के स्नेहपूर्ण साथ की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया। न्यायालयीन एवं सामाजिक स्तर पर किए गए इस सकारात्मक प्रयास का असर यह हुआ कि दोनों पक्ष आपसी सहमति से विवाद समाप्त करने को तैयार हो गए।
राजीनामे के पश्चात दंपती ने प्रेम और सहयोग के साथ पुनः दाम्पत्य जीवन जीने का संकल्प व्यक्त किया, जिसके आधार पर प्रकरण का विधिवत निराकरण किया गया। इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश संतोष कुमार आदित्य ने दोनों को एक-एक गमला भेंट कर उनके नए जीवन की शुभकामनाएं दीं।
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