एमसीबी , जनवरी 16 -- छत्तीसगढ़ सरकार की किसान-हितैषी पहल ने राज्य में लागू पारदर्शी एवं डिजिटल धान खरीदी व्यवस्था ने न केवल प्रक्रियाओं को सरल बनाया है, बल्कि किसानों के जीवन में आर्थिक स्थिरता और विश्वास का नया भाव भर दिया है। इस व्यवस्था के सकारात्मक परिणाम मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के कृषक राम बरन सिंह मरकाम के जीवन में साफ देखे जा सकते हैं।
जिला जनसंपर्क अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि साल्ही गांव के निवासी मरकाम ने चैनपुर उपार्जन केंद्र पर अपनी 51.20 क्विंटल धान की फसल का सफलतापूर्वक विक्रय किया। पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी रही, जिसमें डिजिटल तौल से लेकर तत्काल भुगतान तक का सुगम अनुभव रहा। केंद्र पर किसानों की सुविधा के लिए बैठने की व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल और छायादार स्थान जैसी मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराई गई थीं, जिसने कार्य को और सहज बना दिया।
किसान ने बताया कि पिछले वर्षों में धान बेचने के दौरान लंबी प्रतीक्षा, अनिश्चितता और भुगतान में देरी जैसी समस्याएं आम थीं लेकिन इस वर्ष की डिजिटल व्यवस्था ने न सिर्फ इन समस्याओं का समाधान किया, बल्कि किसानों को उनके अधिकार और सम्मान का एहसास भी दिलाया। समय पर प्राप्त भुगतान ने उनकी आर्थिक योजना बनाने में मदद की है, जिससे वे अगली फसल की तैयारी, बच्चों की शिक्षा और परिवार की अन्य जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हुए हैं।
किसान मरकाम की यह कहानी राज्य सरकार की किसान-केंद्रित नीतियों की सार्थकता को प्रमाणित करती है। यह सफलता अन्य किसानों को भी डिजिटल व्यवस्था से जुड़ने और अपनी आय बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इस नई व्यवस्था ने कृषि क्षेत्र में न केवल दक्षता बढ़ाई है, बल्कि किसानों के जीवन में आशा और आत्मनिर्भरता का नया संचार भी किया है।
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