, Dec. 4 -- कांग्रेस की डॉ प्रभा मल्लिकार्जुन ने कहा कि विधेयक में स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले इस काम से जुड़े कर्मचारियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए उपाय करने के संबंध में कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। इसमें छोटे कारोबारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए और बीड़ी तथा इस काम से जुड़े श्रमिकों के स्वास्थ्य का हर तरह से ध्यान रखा जाना चाहिए। इसी तरह से तम्बाकू से होने वाली समस्या के उपचार के लिए दी जानी वाली सुविधा का विधेयक में स्पष्ट विवरण होना चाहिए।

भाजपा की भारती पारधी ने कहा कि पान मसाला पर उपकर लगाने का प्रावधान विधेयक में किया गया है और यह सही समय पर उठाया गया उचित कदम है। उन्होंने कहा कि जिस तरह के प्रावधान किए गये हैं उससे उम्मीद है कि यह विधेयक व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी बनाएगा। इसमें जिस तरह से सभी पक्षों पर बारीकी से ध्यान दिया गया है उससे सरकार की संवेदनशीलता स्पष्ट झलकती है। उनका कहना था कि यह विधेयक न सिर्फ आर्थिक दृष्टि से बल्कि समग्रता के हिसाब से भी महत्वपूर्ण है।

सपा के राजीव राय ने कहा कि इस काम से पूरे देश में करीब साढ़े चार करोड़ लोग जुड़े हैं और उनके स्वास्थ्य की परवाह जरूरी है। उन्होंने गुटखा पर उपकर लगाने को बेतुका बताया और कहा कि नागरिकों की सुरक्षा गुटखा और पान मसाला पर निर्भर नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पान मसाला से सरकार कमाई करना चाहती है और इसके लिए उसने उपकर लगाने की व्यवस्था की है तो इससे होने वाली कमाई से उसे कैंसर अस्पताल या स्वास्थ्य की अन्य सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए।

राष्ट्रीय जनता दल के सुधाकर सिंह ने कहा कि पान मसाला के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा शब्द जोड़ना चिंता का विषय है और इससे साफ होता है कि सरकार इस तरह के विधेयक लाकर इंस्पेक्टर राज की वापसी करना चाहती है। विधेयक में राज्यों के साथ उपकर के बंटवारे का उल्लेख नहीं है। सरकार इस मामले को राष्ट्रीय और स्वास्थ्य सुरक्षा से जोड़कर भावनात्मक रूप से खेलने का प्रयास कर रही है लेकिन सच यह है कि इस तरह के प्रयास जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि इससे अर्जित उपकर कहां जाएगा इसको लेकर कहीं कोई सप्ष्ट उल्लेख नहीं है। नशे की बुरी आदत को रोकना है तो सख्त कानूनी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए और जन जागरूकता पैदा कर ठोस उपाय करने पड़ेंगे। पान मसाला आदि के लोक लुभावने विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए इसलिए सिर्फ टैक्स बढ़ाने से कुछ निर्णायक परिणाम मिलने वाले नहीं हैं।

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