नयी दिल्ली , जनवरी 28 -- राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशाखापत्तनम की विशेष अदालत ने पाकिस्तान समर्थित जासूसी साजिश मामले में एक प्रमुख आरोपी को दोषी ठहराते हुए साधारण कारावास की सजा सुनाई है।
विशेष अदालत ने आरोपी अल्ताफहुसैन घांचीभाई उर्फ शकील को सिम कार्ड, ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) जैसी विशिष्ट पहचान सुविधाओं और सोशल मीडिया के दुरुपयोग का दोषी मानते हुए सजा सुनाई। शकील ने मुकदमे के दौरान अपना अपराध स्वीकार कर लिया था। अभियोजन पक्ष इस मामले में अब तक 37 गवाहों का परीक्षण कर चुका है।
अदालत ने उसे यूएपीए की संबंधित धारा के तहत पांच साल छह माह के साधारण कारावास और 5,000 रुपये जुर्माने की सजा दी है। इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा के तहत ढाई साल का साधारण कारावास और 5,000 रुपये जुर्माना लगाया गया है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी, जिससे कुल अधिकतम सजा 5.5 वर्ष होगी।
एनआईए के अनुसार, यह सीमा-पार जासूसी साजिश उन भारतीय मछुआरों के सिम कार्डों से जुड़ी थी, जिन्हें पाकिस्तान नौसेना ने ऊंचे समुद्र में मछली पकड़ने के दौरान गिरफ्तार किया था। पाकिस्तान नौसेना ने मछुआरों के मोबाइल फोन और सिम कार्ड जब्त कर लिए थे, जिन्हें बाद में भारत में आरोपी द्वारा सक्रिय कर जासूसी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया गया।
जांच में यह तथ्य सामने आया कि आरोपी ने इन भारतीय सिम कार्डों को अपने मोबाइल फोन में डालकर ओटीपी जनरेट किए और उन्हें पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों के ऑपरेटिव्स को साझा किया। इससे पाकिस्तान में बैठकर भारतीय व्हाट्सएप नंबरों का संचालन संभव हो सका। इन कम्प्रोमाइज्ड भारतीय नंबरों का उपयोग पाकिस्तानी खुफिया एजेंटों ने फर्जी पहचान के जरिए भारतीय रक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़े कर्मियों से संपर्क करने और संवेदनशील एवं गोपनीय रक्षा संबंधी जानकारियां हासिल करने के लिए किया, जिससे देश की एकता, अखंडता, सुरक्षा और संप्रभुता को गंभीर खतरा उत्पन्न हुआ।
एनआईए ने कहा कि वह साइबर माध्यमों से संचालित आतंकवादी और जासूसी गतिविधियों सहित सभी सीमा-पार अपराधों के खिलाफ अपनी कार्रवाई आगे भी जारी रखेगी और ऐसे सभी दोषियों को कानून के कठघरे में लाया जाएगा।
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