मेरठ , फरवरी 01 -- महाभारत कालीन पांडवों की राजधानी हस्तिनापुर एक बार फिर इतिहास के पन्नों से निकलकर वर्तमान की सुर्खियों में आ गयी है। आम बजट 2026-27 में केंद्र सरकार ने इस प्राचीन नगरी को राष्ट्रीय फलक पर प्रतिष्ठित करने की बड़ी पहल की है। देश के 15 प्रमुख पुरातात्विक स्थलों की सूची में हस्तिनापुर को दोबारा शामिल करते हुए यहां के ऐतिहासिक उत्खनन स्थलों को आम लोगों के लिए खोलने का निर्णय लिया गया है।
मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के अध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. कृष्ण कांत शर्मा ने आज पेश किये गये आम बजट की चर्चा करते हुए कहा कि इतिहास प्रेमियों और शोधार्थियों के लिए यह घोषणा किसी उत्सव से कम नहीं है। उन्होंने इस पहल पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि यह लंबे समय से चली आ रही मांग थी। बजट में प्रस्तावित इंटरप्रिटेशन सेंटरों के माध्यम से हस्तिनापुर की हजारों वर्षों पुरानी कहानी आधुनिक तकनीक के साथ जीवंत रूप में प्रस्तुत की जाएगी। हस्तिनापुर आने वाले पर्यटक न केवल शिलाखंड और अवशेष देखेंगे बल्कि पांडवों की राजधानी रहे इस नगर की सांस्कृतिक आत्मा को भी महसूस कर सकेंगे।
डॉ. शर्मा का मानना है कि उत्खनन स्थलों को सार्वजनिक रूप से सुलभ कराना भारतीय सभ्यता की जड़ों से सीधे संवाद जैसा होगा। इससे विद्यार्थियों, इतिहासकारों और आम नागरिकों को उस दौर को समझने का अवसर मिलेगा, जहां से भारतीय संस्कृति ने आकार लेना शुरू किया था।
इस पहल से स्थानीय लोगों में भी नई उम्मीद जगी है। पर्यटन के विस्तार से होटल व्यवसाय, स्थानीय गाइड सेवाएं, हस्तशिल्प और परिवहन क्षेत्र में रोजगार के नए द्वार खुलने की संभावना है। हस्तिनापुर की गलियां जो अब तक इतिहास की खामोशी समेटे थीं आने वाले समय में पर्यटकों की चहल-पहल से गुलजार हो सकती हैं।
फिलहाल आम बजट में मिली यह सौगात हस्तिनापुर के लिए अतीत और भविष्य के बीच एक मजबूत सेतु साबित हो सकती है। यदि योजनाएं जमीन पर उतरीं, तो यह प्राचीन नगरी न केवल अपनी खोई हुई पहचान पाएगी, बल्कि देश के प्रमुख ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्यटन केंद्रों में अग्रणी स्थान भी बना सकती है।
उल्लेखनीय है कि स्वतंत्रता संग्राम की प्रथम चिंगारी भड़काने में अग्रणी भूमिका निभाने वाले मेरठ जिला मुख्यालय से लगभग 34 किलोमीटर दूर हस्तिनापुर तहसील स्थित है। ऐतिहासिक महत्त्व के साथ-साथ हस्तिनापुर जैन धर्म का एक प्रमुख तीर्थ स्थल भी है और देश-विदेश से बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालु यहाँ स्थित प्राचीन और भव्य जैन मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए आते हैं जिससे हस्तिनापुर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान और भी समृद्ध हो जाती है।
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