कोलकाता , दिसंबर 17 -- कलकत्ता उच्च न्यायालय ने शिक्षक भर्ती में कथित भ्रष्टाचार के मामले में गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन (जीटीए) को बड़ा झटका देते हुए बुधवार को 317 शिक्षकों की नियुक्तियों को रद्द कर दिया।
न्यायमूर्ति विश्वजीत बसु ने पूरी भर्ती प्रक्रिया को अवैध और कानून के विरुद्ध करार दिया है। ये नियुक्तियां जीटीए ने की थीं और ये कानूनी जांच के दायरे में आ गईं। सुनवाई के दौरान अदालत ने संज्ञान लिया कि जीटीए की एक बैठक में रोशन गिरि ने इन शिक्षकों के नियमितीकरण का प्रस्ताव रखा था, लेकिन राज्य सरकार ने इस प्रस्ताव पर स्पष्ट रूप से आपत्ति जताई थी।
जीटीए ने तर्क दिया कि तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों के कारण उस समय नियमित भर्ती संभव नहीं थी। हालांकि अदालत ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति बसु की पीठ ने याचिकाकर्ताओं के उस तर्क को स्वीकार किया जिसमें कहा गया था कि उसी अवधि के दौरान अन्य क्षेत्रों में नियुक्तियां की गई थीं, इसलिए जीटीए का असमर्थता का दावा आधारहीन है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि हालांकि इस प्रक्रिया को नियमितीकरण बताया गया था, लेकिन वास्तव में यह नयी नियुक्तियां थीं। पीठ ने टिप्पणी की कि नियमितीकरण की आड़ में नयी नियुक्तियां की गईं, जो कानून का स्पष्ट उल्लंघन है। जीटीए के इस तर्क को भी अदालत ने स्वीकार नहीं किया कि ये नियुक्तियां निजी स्कूलों में की गई थीं। जीटीए अधिनियम की धारा 73 का हवाला देते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि ये स्कूल कानून के अनुसार संचालित थे और राज्य सरकार के नियंत्रण में थे।
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