नयी दिल्ली , मार्च 05 -- कांग्रेस ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के क्रम में 60 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम का विवाद न्यायिक समीक्षा प्रक्रिया में है और जब तक इस विवाद को पूरी तरह से सुलझाया नहीं जाता तब तक राज्य में विधानसभा चुनाव की तारीख घोषित नहीं की जानी चाहिए।
पार्टी ने कहा कि राज्य के लाखों मतदाताओं के संवैधानिक अधिकार पर चुनाव आयोग के जरिए हमला हो रहा है और पार्टी का विश्वास है मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में निष्पक्ष विधानसभा चुनाव नहीं हो सकते हैं इसलिए उच्चतम न्यायालय की देखरेख में मतदान कराया जाना चाहिए।
कांग्रेस के पश्चिम बंगाल के प्रभारी गुलाम मीर, प्रदेश अध्यक्ष शुभांकर सरकार तथा अन्य नेताओं ने गुरुवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण-एसआईआर के नाम पर राज्य के लाखों मतदाताओं को दंडित किया जा रहा है और 60 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम का विवाद न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है जिसके निपटारा होने तक राज्य में चुनाव की तिथियां घोषित नहीं होनी चाहिए। उनका कहना था कि एसआईआर की प्रक्रिया में भारी दिक्कत मतदाताओं को झेलनी पड़ रही है और चुनाव आयोग सही मतदाता को भी बाहर का रास्ता दिखा रहा है जो लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार का हनन है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस की तरफ से चुनाव आयोग को ज्ञापन सौंपा गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि 60 लाख से अधिक मतदाताओं का मामला अभी सुलझा नहीं है इसलिए चुनाव की तारीफ घोषित नहीं की जानी चाहिए। पार्टी ने कहा कि जब तक विवाद सुलझाने का काम पूरा नहीं होता है तो ऐसे माहौल में चुनाव की तिथियां घोषित करना गलत है। पार्टी ने कहा कि राज्य में जिन लाखों लोगों के पास संवैधानिक अधिकार हैं उस अधिकार को एसआईआर के जरिए छीना जा रहा है। अगले कुछ दिनों में राज्य में चुनावों की घोषणा हो सकती है जबकि राज्य के करीब 60 लाख से ज्यादा लोगों का वोट डालने अधिकार न्यायिक समीक्षा की प्रक्रिया में है तो ऐसी स्थिति में चुनाव तारीखों की घोषणा नहीं की जा सकती है।
उनका कहना था कि यदि ऐसे में चुनाव की तारीख तय होती है तो यह 'वोट चोरी' नहीं तो क्या है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची पूरी तरह से तैयार किए बिना मतदान नहीं कराया जा सकता। चुनाव उच्चतम न्यायालय की देखरेख में होने चाहिए क्योंकि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की निष्पक्षता पर पार्टी को भरोसा नहीं है इसलिए यह चुनाव उच्चतम न्यायालय की रेख देख में होना चाहिए। यदि सरकार लोगों के संवैधानिक अधिकारों को नहीं मानती है और मतदाता सूची में उनके नाम का विवाद सुलझाए बिना ही चुनाव की तारीख की घोषणा करती है तो ऐसे में कानूनी रास्ता ही एक विकल्प है और उस पर ही आगे बढना होगा।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की अलग-अलग विधानसभाओं में हजारों लोगों के नाम हटाए गए हैं। मालदा जिले के अलग-अलग विधानसभाओं में लाखों वोटरों के नाम न्यायिक समीक्षा की प्रक्रिया में हैं। सुजापुर में सबसे ज्यादा 1,34,518 वोटर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर की प्रक्रिया में लक्ष्य करके मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं।
कांग्रेस ने सवाल किया कि जब तक विवाद में रखे गये मतदाताओं को लेकर फैसला नहीं हो जाता है तब तक चुनाव की घोषणा नहीं होनी चाहिए और जिन आवेदनों पर विचार किया जा रहा है उन्हें मौका ही नहीं दिया जाएगा तो चुनाव कराने का कोई मतलब नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर चुनाव आयोग ऐसा नहीं करता हैं, तो माना जाएगा कि साफ तौर पर ये 'वोट चोरी' हो रही है। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश यही रहेगी कि किसी भी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से कटे नहीं। उनका यह भी कहना था कि कांग्रेस पूरी ताकत और क्षमता के साथ मुद्दों पर पश्चिम बंगाल में चुनाव लड़ेगी।
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