कोलकाता , मार्च 12 -- चुनाव आयोग ने आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों को स्वतंत्र, निष्पक्ष और भयमुक्त बनाने के लिए राज्य भर में पर्यवेक्षकों, सुरक्षा बलों और तकनीकी निगरानी तंत्र की तैनाती को बड़े स्तर पर बढ़ाने का निर्णय लिया है।
पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय ने सामान्य, पुलिस और व्यय पर्यवेक्षकों की संख्या में भारी वृद्धि का प्रस्ताव दिया है। सूत्रों के अनुसार, 2021 के चुनाव में जहां 160 सामान्य पर्यवेक्षक थे, इस बार उनकी संख्या कई गुना बढ़ सकती है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया, "हमने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कम से कम एक सामान्य पर्यवेक्षक तैनात करने का प्रस्ताव दिया है, जबकि संवेदनशील निर्वाचन क्षेत्रों में निगरानी मजबूत करने के लिए एक से अधिक पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की जा सकती है।"इसी प्रकार पुलिस एवं व्यय (आर्थिक) पर्यवेक्षकों की संख्या में भी भारी वृद्धि की जायेगी। पिछले चुनाव में जहां पूरे राज्य में 37 पुलिस पर्यवेक्षक थे, वहीं इस बार आयोग ने कहीं अधिक तैनाती की योजना बनायी है। अधिकारी के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए संवेदनशील चुनाव क्षेत्रों में एक से अधिक पुलिस पर्यवेक्षक नियुक्त किये जा सकते हैं।
कानून-व्यवस्था पर पूर्ण नियंत्रण के लिए केंद्रीय बलों की भारी तैनाती शुरू हो गयी है। सुरक्षा ब्लूप्रिंट के अनुसार, राज्य में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की लगभग 480 कंपनियां तैनात की गयी हैं। अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से सटे और राजनीतिक रूप से संवेदनशील जिलों में बलों का अधिक जमावड़ा रहेगा।
चुनाव में पारदर्शिता के लिए तकनीक का सहारा लेते हुए आयोग ने राज्य के सभी मतदान केंद्रों पर 100 प्रतिशत वेबकास्टिंग शुरू करने का निर्णय लिया है। वर्तमान में राज्य में 80,719 मतदान केंद्र हैं और भीड़ कम करने के लिए लगभग 500 अतिरिक्त सहायक बूथ बनाये जा सकते हैं।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित