कोलकाता , जनवरी 25 -- पश्चिम बंगाल ने अगले पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद के बीच संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के आठ वरिष्ठ अधिकारियों की एक सूची भेजी है।
वर्तमान में कार्यवाहक डीजीपी के रूप में कार्यरत राजीव कुमार 31 जनवरी को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। हालांकि अगले डीजीपी के नाम पर हालांकि अभी भी फैसला होना बाकी है।
अनिश्चितता तब और बढ़ गई जब राज्य द्वारा यूपीएससी को भेजी गई प्रस्तावित सूची में राजीव कुमार का नाम भी शामिल मिला। इससे यह अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या सरकार उन्हें शीर्ष पद पर बनाए रखना चाहती है।
केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के निर्देश के बाद बुधवार को आठ अधिकारियों की यह सूची यूपीएससी को भेजी गई।
इस पैनल में राजीव कुमार के अलावा राजेश कुमार का नाम भी शामिल है, जिन्होंने आरोप लगाया था कि डीजीपी पद के लिए उनके नाम पर विचार नहीं किया गया। राजेश कुमार भी इसी साल 31 जनवरी को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। सूची में छह अन्य वरिष्ठ अधिकारी रणबीर कुमार, देबाशीष रॉय, अनुज शर्मा, जगमोहन, एन. रमेश बाबू और सिद्धनाथ गुप्ता शामिल हैं।
नियमों के अनुसार, राज्य सरकार पात्र वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की सूची यूपीएससी को भेजती है, जो फिर तीन नामों की एक संक्षिप्त सूची तैयार करता है। राज्य सरकार उन तीन में से किसी एक को डीजीपी के रूप में चुनती है। पश्चिम बंगाल के पिछले पूर्णकालिक डीजीपी मनोज मालवीय थे, जो दिसंबर 2023 में सेवानिवृत्त हुए थे। तब से राजीव कुमार कार्यवाहक डीजीपी के रूप में कार्यभार संभाल रहे हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि प्रशासनिक मजबूरियों के कारण पैनल में राजीव कुमार का नाम शामिल किया गया है। नियमों के मुताबिक, उन सभी अधिकारियों के नाम भेजने होते हैं जो पिछले डीजीपी की सेवानिवृत्ति के समय पात्र थे, इसीलिए उनका नाम इस सूची में है। अधिकारियों का कहना है कि इसका मतलब यह कतई नहीं है कि राज्य उन्हें फिर से नियुक्त करने का इरादा रखता है।
सूत्रों के अनुसार, फिलहाल अनुज शर्मा, सिद्धनाथ गुप्ता और रणबीर कुमार के नामों पर चर्चा चल रही है, हालांकि यह निश्चित नहीं है कि अंतिम चयन इन्हीं तीनों तक सीमित रहेगा।
इससे पहले, राज्य ने स्थायी डीजीपी की नियुक्ति के लिए एक सूची भेजी थी, लेकिन कानूनी उलझनों के कारण प्रक्रिया रुक गई थी। यूपीएससी ने बाद में उस पैनल को यह कहते हुए वापस कर दिया था कि इसे तत्कालीन डीजीपी की सेवानिवृत्ति से कम से कम तीन महीने पहले (सितंबर 2023 तक) जमा किया जाना चाहिए था, जबकि राज्य ने इसे उसी वर्ष 27 दिसंबर को भेजा था।
इस बीच, जन शिक्षा विस्तार और पुस्तकालय सेवा विभाग के प्रधान सचिव के रूप में कार्यरत 1990 बैच के आईपीएस अधिकारी राजेश कुमार ने कैट का रुख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पात्र होने के बावजूद उन्हें डीजीपी पद के लिए नजरअंदाज किया गया। उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधिकरण ने राज्य को 23 जनवरी तक दोबारा पैनल भेजने का निर्देश दिया था।
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