नयी दिल्ली , मार्च 23 -- ईरान युद्ध अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और इसके तत्काल समाप्त होने की कोई संभावना नजर नहीं आ रही है।
अब तक के मौजूदा आकलन एवं रिपोर्टों से पता चलता है कि युद्ध वास्तव में एक लंबे और जटिल गतिरोध में बदल गया है, जिसमें सामरिक सफलताओं के साथ-साथ महत्वपूर्ण रणनीतिक गलत आंकलन भी शामिल हैं, विशेष रूप से अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरानी सैन्य क्षमताओं एवं सामर्थ्य के संदर्भ गलत अनुमान लगाया गया था।
अमेरिका और इज़रायल दोनों को शायद यह भ्रम था कि अयातुल्ला अली खामेनेई और अन्य ईरानी नेताओं की लक्षित हत्याओं से युद्ध समाप्त हो जाएगा और ईरान जवाबी कार्रवाई नहीं करेगा, जैसा कि 2025 में ईरानी परमाणु सुविधाओं पर हमले या 2020 में इराक में ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या के समय हुआ था। हर बार ईरान ने इस तरह की जवाबी कार्रवाई नहीं की, जैसी वह अब कर रहा है।
इसके अलावा, वेनेजुएला में कुछ घंटों तक चले और बिना किसी प्रतिरोध के सफल अभियान के बाद अमेरिका आत्मसंतुष्ट हो गया था। लेकिन इस बार ईरान ने अमेरिका को गलत साबित कर दिया। यही अमेरिका की सबसे बड़ी गलती थी।
हालांकि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ गहन सैन्य अभियान चलाए हैं लेकिन कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां अमेरिका और इज़रायल अति आत्मविश्वास से भरे हुए थे और लापरवाह हो गए। खबरों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्वीकार किया है कि ईरान द्वारा एक साथ कई अमेरिकी और इज़रायली ठिकानों पर किए गए हमले ने उन्हें चौंका दिया।
ईरान से 4000 किलोमीटर दूर हिंद महासागर क्षेत्र में स्थित डिएगो गार्सिया पर ईरान द्वारा किए गए मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल हमले ने युद्ध को एक नया आयाम दिया क्योंकि इससे ईरानी मिसाइलों की लंबी दूरी की मारक क्षमता का पता चला। इसके अलावा, 22 मार्च को दक्षिण दिमोना शहर में इजरायल के परमाणु संयंत्रों पर ईरानी मिसाइल हमले ने इजरायली मिसाइल रक्षा प्रणाली की कमजोरी को उजागर किया। इजरायली अधिकारियों ने कहा कि वे इस बात की जांच करेंगे कि इजरायली इंटरसेप्टर आने वाली मिसाइलों को रोकने में क्यों विफल रहे।
ईरानी नेताओं ने बार-बार कहा है कि अगर अमेरिका और इज़रायल ईरान में जमीनी सेना भेजते हैं तो उन्हें अप्रत्याशित परिणामों का सामना करना पड़ेगा।
जून 2025 और फिर फरवरी 2026 में परमाणु और सैन्य अवसंरचना पर बड़े हमलों के बावजूद, ईरान की सरकार नहीं गिरी जैसा कि कुछ लोगों को उम्मीद थी। इसके बजाय, तेहरान का रुख और सख्त हो गया। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं का आकलन करने में विफल रहा। 'रोरिंग लायन' जैसे अभियानों के बाद भी ईरान ने पर्याप्त भंडार बनाकर रखा हुआ है और अमेरिकी ठिकानों और क्षेत्रीय लक्ष्यों पर जवाबी हमला कर रहा है।
सामरिक एवं सैन्य त्रुटियों के अलावा, आर्थिक त्रुटि निस्संदेह अमेरिका और इज़रायल की सबसे बड़ी गलती साबित हुई है। ईरान द्वारा रणनीतिक होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद करने और अमेरिकी सैन्य अड्डों वाले खाड़ी देशों पर हमलों ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को बुरी तरह प्रभावित किया है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजारों में उथल-पुथल मच गई है और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर चुकी है।
ईरान के परमाणु संयंत्रों पर 2025 में हुए हमलों के बाद, अमेरिका को लगता था कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम कम से कम दो साल पीछे चला गया है। हालांकि, अब रिपोर्टों से संकेत मिल रहा है कि ईरान ने अपने अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम भंडार को कहीं छिपाया हो सकता है। अमेरिकी ठिकानों वाले खाड़ी देशों पर ईरानी हमलों के साथ, युद्ध एक परोक्ष चरण में प्रवेश कर गया है और प्रत्यक्ष हमलों से आगे बढ़कर एक बहु-मोर्चे वाला अपरंपरागत युद्ध बन गया।
इसके अलावा, श्री ट्रंप के "ईरान को नक्शे से मिटा दो" या "पूरी तरह से नष्ट कर दो", "उसकी सेना खत्म, वायुसेना नष्ट या नौसेना समुद्र में डूबी हुई", जैसे बयान भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। इन बयानों के बाद ईरान ने अचानक जवाबी मिसाइल हमले किए।
श्री ट्रम्प के बयान उनकी घोर रणनीतिक गलतफहमी, अति उत्साह एवं अपर्याप्त खुफिया रिपोर्टों को दर्शाते हैं, जिन्होंने सीधे तौर पर युद्ध के लंबे समय तक चलने और अनिश्चितता में योगदान देने का कार्य किया है।
श्री ट्रंप ने 20 मार्च को दावा किया कि ईरान की सेना "पूरी तरह नष्ट" और "मृत" हो चुकी है। श्री ट्रंप शुरू से ही लगातार कहते रहे हैं कि यह युद्ध चार-पांच सप्ता" चलेगा। फिर भी, 23 मार्च तक इसका कोई अंत नजर नहीं आ रहा है।
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