श्रीगंगानगर , मई 11 -- पंजाब प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कहा है कि नहरों में जहरीला काला पानी आ रहा है जिससे पश्चिमी राजस्थान के कई जिलों में लोग कैंसर जैसी घातक बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं।
श्री गंगानगर जिले के साथ लगते पंजाब के अबोहर क्षेत्र में नहरों और रजबाहों का जायजा लेने के बाद साेमवार को सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में श्री जाखड़ ने इसके लिये मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को सीधे जिम्मेदार ठहराया।
उल्लेखनीय है कि पंजाब से यह जहरीला और रसायनयुक्त पानी श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों सहित पश्चिमी राजस्थान के 10 जिलों में पिछले डेढ़ दशक से प्रवाहित हो रहा है पंजाब की तरह राजस्थान के इस क्षेत्र में लाखों लोग कैंसर जैसी ही अन्य असाध्याय बीमारियों से पीड़ित हो गए हैं। इस क्षेत्र में भी लोग बेमौत मार रहे हैं।
श्री जाखड़ ने कहा कि नहरों में काला जहरीला पानी आ रहा है। सेम नालों की सफाई नहीं हो रही। इस पानी के कारण लोग बीमार हो रहे हैं, मछलियां मर रही हैं। यह पानी पीने योग्य भी नहीं है। नहरों में सीवरेज का पानी मिला हुआ है, जो इंसानों, खेती और पशु-पक्षियों के लिए घातक है। सरकार के अपने विभाग ने भी इसे प्रदूषित मानते हुए वाटर वर्क्स में डालने से मना कर दिया है, जिससे गांवों में पेयजल का भारी संकट पैदा हो गया है।
उन्होंने कहा कि यह जहरीला और रसायनयुक्त पानी पंजाब की नदियों-दरियाओं से इंदिरा गांधी नहर, गंगनहर और भाखड़ा नहर प्रणाली के माध्यम से राजस्थान पहुंच रहा है। श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ सहित पश्चिमी राजस्थान के करीब 10 जिलों के लाखों लोग इस प्रदूषित पानी की चपेट में हैं। यहां जल स्रोत दूषित हो रहे हैं, मिट्टी की उर्वरता घट रही है, पशु-पक्षी प्रभावित हो रहे हैं और कैंसर जैसी असाध्य बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं।
राजस्थान के राज्यपाल ने हाल ही में एक कार्यक्रम में इस मुद्दे पर गहरी चिंता व्यक्त की थी और जहरीले पानी के स्वास्थ्य, जीव-जंतुओं तथा पर्यावरण पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभावों को लेकर चेतावनी दी थी। राजस्थान के किसान, पशुपालक और आम नागरिक पिछले दो दशकों से इस समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन पंजाब सरकार की लगातार उदासीनता के कारण कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका।
श्रीगंगानगर से कई बार सांसद रह चुके भाजपा नेता निहालचंद मेघवाल ने कई बार बयान दिए हैं कि केंद्र सरकार ने पंजाब को पानी शोधन संयंत्र लगाने के लिए 700 करोड़ रुपये से ज्यादा दिए हैं, फिर भी समस्या जस की तस बनी हुई है। राजस्थान के सामाजिक संगठन, किसान यूनियनें और राजनीतिक दल लगातार आंदोलन कर रहे हैं और मामला राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) तक पहुंच चुका है।
सूत्रों ने बताया कि यह समस्या दो दशक पुरानी है। पंजाब में चाहे किसी भी पार्टी की सरकार रही हो, इस जहरीले पानी का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। चुनाव नजदीक आने पर विपक्षी दल इसे उठाते हैं, लेकिन राजस्थान के प्रभावित जिलों में रहने वाले लोग कहते हैं कि उनकी पीड़ा और स्वास्थ्य संकट को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। राजस्थान के लोग अब मांग कर रहे हैं कि केंद्र सरकार, पंजाब और राजस्थान सरकार मिलकर इस समस्या का तुरंत और स्थायी समाधान निकालें, ताकि पश्चिमी राजस्थान के करोड़ों लोग कैंसर, प्रदूषण और पर्यावरणीय तबाही से मुक्ति पा सकें।
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