अमृतसर , दिसंबर 30 -- श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 328 पवित्र रूपों के मामले को लेकर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति ( एसजीपीसी) के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने पंजाब सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा है कि एसजीपीसी को उच्च न्यायालय से सक्षम निकाय के रूप में मान्यता प्राप्त होने और प्रशासनिक मामलों में कार्रवाई करने के लिए अधिकृत होने के बावजूद सरकार का प्राथमिकी दर्ज करने का निर्णय उसके राजनीतिक इरादों को साबित करता है।

एडवोकेट धामी ने कहा कि ऐसा करके सरकार श्री अकाल तक़्त साहिब की सर्वोच्चता को भी चुनौती दे रही है, क्योंकि डॉ. ईश्वर सिंह से जांच श्री अकाल तक़्त साहिब ने ही करवाई थी और जांच रिपोर्ट के अनुसार, एसजीपीसी को कार्रवाई करने का आदेश भी श्री अकाल तक़्त साहिब द्वारा ही दिया गया था। उन्होंने कहा कि शिरोमणि समिति ने डॉ. ईश्वर सिंह जांच रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू करते हुए छोटे से लेकर बड़े सभी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है, जिसके बाद सरकार और पुलिस के हस्तक्षेप का कोई मतलब नहीं रह जाता। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार जिस उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए एफआईआर दर्ज करने का मुद्दा उठा रही है, उसमें सरकार ने स्वयं हलफनामा दिया है कि यह अधिकार क्षेत्र सिख गुरुद्वारा न्यायिक आयोग के अंतर्गत आता है। इसके बाद न्यायालय ने याचिकाकर्ता को जवाब देने को कहा था, जिसकी सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि गृह सचिव ने डीजीपी को पत्र लिखा था और न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी थी। उसमें कहीं भी एफआईआर दर्ज करने का आदेश नहीं था। इससे सरकार का दोहरा इरादा स्पष्ट होता है, क्योंकि एक ओर सरकार शिरोमणि समिति को सक्षम निकाय और कार्रवाई के लिए योग्य मान रही है, वहीं दूसरी ओर न्यायालय के आदेश का झूठा बहाना बनाकर एफआईआर दर्ज करवा रही है। यह मान सरकार की राजनीतिक चाल है, जिससे सिख मामलों में उसका हस्तक्षेप उजागर होता है।

2021 में उच्च न्यायालय में लंबित एक अन्य मामले का जिक्र करते हुए एसजीपीसी अध्यक्ष ने कहा कि इसमें भी तत्कालीन सरकार ने सिख गुरुद्वारा अधिनियम के अनुसार शिरोमणि समिति को अपने प्रशासनिक मामलों पर निर्णय लेने का अधिकार दिया था। इस मामले में सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि सिख संगठन के सेवा नियमों में सरकार का हस्तक्षेप उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यह मामला अभी भी अदालत में लंबित है। इस मामले के एक आरोपी जुझार सिंह के पुलिस आयुक्त को दिये गये एक आवेदन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि शिरोमणि समिति की राय के बाद पुलिस आयुक्त ने इसे शिरोमणि समिति का प्रशासनिक मामला बताकर बंद कर दिया था। सरकार की इन कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि यह शिरोमणि समिति का प्रशासनिक मामला है, जिसमें सरकार और पुलिस का कोई हस्तक्षेप नहीं है।

एडवोकेट धामी ने कहा कि श्री अकाल तक़्त साहिब के आदेशों के अनुसार, सरकार को सिख संस्था के मामलों में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह मामला बहुत गंभीर है, जिसके संबंध में शिरोमणि समिति ने किसी को कोई रियायत नहीं दी है और न ही भविष्य में देगी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि शिरोमणि समिति किसी भी आरोपी का समर्थन नहीं कर रही है और इस संबंध में किए जा रहे झूठे प्रचार को बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने दोहराया कि जिस प्रस्ताव के माध्यम से शिरोमणि समिति ने कानूनी कार्रवाई को मंजूरी दी थी, उसी प्रस्ताव को विद्वानों की राय के अनुसार अगले प्रस्ताव में वापस लेने और स्वयं कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया था। तदनुसार, पूरी कार्रवाई पूरी हो चुकी है। कई कर्मचारियों द्वारा उच्च न्यायालय में अपील करने के बाद न्यायालय के आदेश के बावजूद, संबंधित कर्मचारियों को बहाल किया गया और फिर तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया और अब तक किसी के साथ पक्षपात नहीं किया गया है।

शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष ने सीए सतिंदर सिंह कोहली के बारे में कहा कि इस मामले में धन वसूली के लिए सिख गुरुद्वारा न्यायिक आयोग में मुकदमा चल रहा है, जिसकी अगली सुनवाई जनवरी 2026 में है। शिरोमणि कमेटी ने इस मामले में कभी ढिलाई नहीं बरती और निर्णय होते ही तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। इस मामले में आगे की कार्रवाई पूरी तत्परता से की जा रही है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ने बेअदबी के मुद्दे पर राजनीति करके सरकार बनाई थी, जिसमें नाकाम होने के बाद अब अदालतों में दिये गये हलफनामों के खिलाफ जाकर राजनीति की जा रही है। यहां तक कि पंजाब सरकार भी डेरा सिरसा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के मामले पर चुप्पी साधे हुए है।

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