रांची , फरवरी 13 -- देशभर में चल रहे टाइगर एस्टीमेशन अभियान में झारखंड ने बढ़त बना ली है।

राज्य में पहले और दूसरे चरण का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है, जबकि तीसरे चरण की शुरुआत हो चुकी है। यह पूरी प्रक्रिया जून 2026 तक चार चरणों में पूरी की जाएगी। देश में कुल 58 टाइगर रिजर्व हैं, जिनमें झारखंड का पलामू टाइगर रिजर्व इस बार अग्रणी भूमिका में है।

पलामू टाइगर रिजर्व के निदेशक सह सीएफ एसआर नटेश ने बताया कि पहले और दूसरे चरण का डाटा वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट को भेजा जा चुका है। अब तीसरे चरण में कैमरा ट्रैप लगाने का कार्य शुरू हो गया है। इसकी शुरुआत पलामू टाइगर रिजर्व से की गई है और अन्य वन क्षेत्रों में भी जल्द कैमरे लगाए जाएंगे। इस चरण में वन्यजीवों की गतिविधियों का वैज्ञानिक तरीके से आकलन किया जाएगा।

टाइगर एस्टीमेशन के दौरान राज्य में वन्यजीवों की मौजूदगी को लेकर अहम जानकारियां सामने आई हैं। झारखंड के लगभग सभी वन क्षेत्रों में तेंदुओं की मौजूदगी के प्रमाण मिले हैं। वहीं पलामू, गढ़वा, लातेहार, हजारीबाग और चतरा जिलों में बाघों के भी साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। अकेले पलामू टाइगर रिजर्व क्षेत्र में करीब 150 तेंदुओं के संकेत मिले हैं, जबकि लगभग छह बाघों की मौजूदगी दर्ज की गई है।

पूरे अभियान के लिए राज्य में 1600 वन कर्मियों की तैनाती की गई है। पलामू क्षेत्र में 300 ट्रैकर और 110 फॉरेस्ट गार्ड निगरानी में लगे हैं। टाइगर एस्टीमेशन के लिए झारखंड को पांच जोन और 36 डिवीजन में विभाजित किया गया है।

ज्ञातव्य है कि पलामू टाइगर रिजर्व का गठन 1972-73 में हुआ था। यहां 2006 में 10 बाघ, 2014 में 3, 2018 में शून्य, 2023 में 3 और 2025 में 6 बाघ दर्ज किए गए हैं। इस बार राज्यव्यापी आकलन से संरक्षण की दिशा में नई रणनीति तय होने की उम्मीद है।

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