पटना , फरवरी 24 -- ्लास्टिक कचरा से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान, ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत औरंगाबाद में प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन की एक विशिष्ट पहल की जा रही है, जिसके अंतर्गत लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान अंतर्गत निर्मित प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाइयों (पीडब्ल्यूएमयू) पर संग्रहित प्लास्टिक कचरे को निजी उद्यम के सहयोग से रिसाइकल कर प्लास्टिक की ईंट और टाइल्स का निर्माण हो रहा है। इस पहल से पर्यावरण संरक्षण के साथ ही रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं और स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा मिल रहा है।

प्लास्टिक कचरा पर्यावरण को प्रदूषित करने के साथ जनस्वास्थ्य पर भी असर डालता है। लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान अंतर्गत औरंगाबाद जिला में औरंगाबाद, दाउदनगर तथा नवीनगर प्रखंडों में प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाई (पीडब्लयूएमयू) संचालित है। यहां ग्राम पंचायतों से लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान अंतर्गत घर-घर से कचरा उठाव के दौरान संग्रहित प्लास्टिक कचरा लाया जाता है। साथ ही, नगरीय क्षेत्रों से संग्रहित एवं स्थानीय कबाड़ीवाला से भी प्लास्टिक अपशिष्ट आता है। यहां प्लास्टिक कचरे की अलग-अलग श्रेणियों में छंटाई कर डस्ट रिमूवर, श्रेडर एवं बेलर मशीनों द्वारा मूल्य संवर्धन किया जाता है।

लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट एवं सावित्री रिन्युएबल एनर्जी प्रा. लि. के बीच अनुबंध के तहत सावित्री रिन्युएबल एनर्जी प्रा. लि. द्वारा प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाइयों पर प्रसंस्कृत एकल उपयोग वाले और मल्टी लेयर प्लास्टिक अपशिष्ट से पुनर्चक्रण के माध्यम से प्लास्टिक टाइल्स और ईंटों का निर्माण किया जा रहा है।

औरंगाबाद, दाउदनगर तथा नवीनगर प्रखंडों में अपशिष्ट प्रबंधन इकाई पर प्लास्टिक अपशिष्ट को अलग-अलग छांटा जाता है। सिंगल यूज प्लास्टिक तथा मल्टीलेयर प्लास्टिक को साफ कर छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है। फिर इन काटे गये टुकड़ों से पाउडर तैयार किया जाता है। इस पाउडर को गर्म करने के बाद इसमें 60:40 के अनुपात में रेत मिलाया जाता है। इस पूरे मिश्रण को सांचे में ढालकर आवश्यकतानुसार प्लास्टिक का ईंट या टाइल्स तैयार किया जाता है।

सावित्री रिन्युएबल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ एवं फाउंडर अतुल कुमार ने बताया कि वह सिंगल यूज प्लास्टिक और मल्टीलेयर प्लास्टिक से ब्लॉक बनाते हैं। जबकि हार्ड प्लास्टिक आगे रिसाइकिलर को बेच देते हैं। जिससे अपशिष्ट प्लास्टिक पूर्ण रूप से रिसायकल हो सके।

जिला समन्वयक, लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान औरंगाबाद अजीत शरण ने बताया कि ग्राम पंचायतों से एकत्र प्लास्टिक अपशिष्ट को प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाई पर साफ कर, छंटाई के बाद कतरन एवं स्लैब में बदला जाता है। सावित्री रिन्युएबल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा खरीदी जाती तथा प्लास्टिक टाइल्स का निर्माण शुरू किया गया है। इसे निजी उद्यमिता को बढावा मिला है। रोजगार सृजन हुआ है और स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को बल मिला है। प्लास्टिक कचरे को रीसाइकिल कर पेवर ब्लॉक और ईंट बनाने से प्लास्टिक कचरे के बढ़ते अंबार से भी निजात मिली है।

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