इटावा , दिसंबर 9 -- चंबल इलाके से जुड़े उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में बसरेहर विकास खंड के खरदूली गांव में स्थित प्राथमिक स्कूल विलुप्त हो रहे कौआ का सबसे आशियाना बन गया है।

इस प्राथमिक स्कूल में कौओ की हजारों की संख्या को देखकर के पर्यावरण विशेषज्ञ भी हैरत में पड़ गए हैं कि इतनी बड़ी तादाद में कौवे एक स्थान पर कैसे एक जुट हो रहे है। विलुप्त हो रहे कौवों के हजारों की संख्या में यहां एकजुट होने के पीछे प्राथमिक स्कूल में तैनात सहायक अध्यापिका श्रीमती सुनीता यादव के अथक मेहनत और प्रेरणा माने जा रही है।

श्रीमती यादव ने स्कूल के शिक्षक शिक्षिकाओं के साथ-साथ स्कूली बच्चों को भी इस बात का संदेश दिया है कि पर्यावरण के प्रति हमेशा सजग रहे जिसका जीता जाता नमूना यह देखने को मिल रहा है कि यहां कौवा की हजारों की संख्या पहुंचना शुरू हो गई है।

उन्होंने स्कूल के शिक्षक शिक्षकों के साथ-साथ छात्र-छात्राओं को भी इस बात का संदेश दिया है कि अपने भोजन का कुछ हिस्सा पक्षियों के खाने के लिए डाला जाए ।

सुनीता यादव की बात को मानने और सुनने के बाद शिक्षक शिकाओं के साथ-साथ स्कूली छात्र-छात्राओं ने भी अपने भोजन का कुछ हिस्सा पक्षियों के लिए डालना शुरू किया तो अन्य पक्षियों के अलावा कुवा ने बड़ी संख्या में आना शुरू कर दिया आज हजारों की संख्या स्कूल में कौवा की जमा होना शुरू हो गई है।

सहायक शिक्षिका का बताती है कि उनका स्कूल ग्रामीण क्षेत्र में स्थापित है जहां के शिक्षक शिक्षिकाएं और स्कूली बच्चे पक्षियों के लिए अपना खाना डालते हैं और इसी के साथ ही अन्य पक्षियों के अलावा कुवा ने बड़ी संख्या में यहां पर आना शुरू कर दिया है।

यादव की पर्यावरणीय पहल की तारीफ इटावा के पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. आशीष त्रिपाठी करते हुए बताते है कि पर्यावरण से जुड़ी शिक्षिका श्रीमती सुनीता यादव की प्रेरणा से उनके प्राथमिक स्कूल में बड़ी संख्या में कौवे की मौजूदगी कहीं ना कहीं स्थानीय लोगों को बेहद खुश कर रही है।

उनका कहना है कि सुनीता यादव जिस तरह से पर्यावरण के प्रति सजग और संवेदनशील बनी हुई है जाहिर है कि उनकी मेहनत का असर भी व्यापक पैमाने पर दिखाई दे रहा है तभी उनके प्राथमिक स्कूल में कौवों के अलावा बड़ी संख्या में पक्षियों की आवाजाही शुरू हो गई है।

स्कूल के छात्र अमित कुमार बताते है कि सुनीता बहन जी स्कूल के शिक्षक शिक्षकों को पर्यावरण के प्रति सजग किया है कि इसके बाद स्कूल के शिक्षक शिक्षिकाएं और छात्र-छात्राए पक्षियों के लिए अपने भोजन का कुछ हिस्सा डालना शुरू कर दिए हैं इसके बाद स्कूल में बड़ी संख्या में पक्षियों ने आना शुरू कर दिया है।

शिक्षिका इटावा की बड़ी पर्यावरण प्रेमियों में से एक मानी जाती है, उन्होंने इटावा स्थित अपने गंगा विहार कॉलोनी के आवास को तो गौरैया हाउस के रूप में ही तब्दील कर दिया है जिसमें सैकड़ो की संख्या में गौरैया चिड़िया हमेशा बनी रहती है। उन्होने सैकड़ो की संख्या में गौरैया चिड़िया के घोसले भी अपने घरों में लगाए हैं जहां पर हर साल गौरैया चिड़िया का प्रजनन होता है और छोटे-छोटे मासूम बच्चे हवा में उड़कर के तैरते रहते हैं। मूल रूप से हमीरपुर जिले के मनना गांव की निवासी सुनीता प्राथमिक शिक्षिका के तौर पर तैनाती इटावा जिले के बसरेहर विकासखंड के खरदूली स्थित प्राथमिक विद्यालय में है। वह गौरैया प्रेम के चलते कई पुस्तकों को भी लिख चुकी ।

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