बारां , जनवरी 12 -- राष्ट्रीय संत एवं श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, अयोध्या के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविन्द देव गिरी महाराज ने राजस्थान के बारां जिले की शाहबाद तहसील में प्रस्तावित ग्रीनको एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड, हैदराबाद की हाइड्रो पावर बिजली परियोजना को लेकर काटे जाने वाले लाखों पेड़ों पर गहरा दुख एवं चिंता व्यक्त की है।

कथा समापन के बाद राजस्थान में बारां से प्रस्थान होने से पूर्व स्वामी गिरी ने कहा, "यह अत्यंत पीड़ादायक है कि हम प्रदूषण से जूझ रहे हैं, शासन- प्रशासन द्वारा निरंतर वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति संतुलन की बातें की जाती हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसी परियोजनाओं को स्वीकृति दी जाती है, जिनसे घने जंगल, जल स्रोत, वन्य जीव और स्थानीय जनजीवन पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। पर्यावरण का नाश कर विकास की दलील देना महंगा पड़ेगा।" उन्होंने इसे नीति और व्यवहार के बीच विरोधाभास बताते हुए कहा कि प्रकृति के साथ सामंजस्य ही भारतीय जीवन दर्शन का मूल है।

स्वामी गिरि ने कहा कि विकास आवश्यक है लेकिन ऐसा विकास जो प्रकृति को नष्ट कर दे, भावी पीढ़ियों के भविष्य से खिलवाड़ के समान है। उन्होंने चेताया कि जंगलों के विनाश और पारिस्थितिकी असंतुलन का दुष्परिणाम आने वाले वर्षों में समाज को भोगना पड़ेगा। प्रधानमंत्री जागरूक एवं संवेदनशील है। इस मामले में वह अच्छा विकल्प सुझा सकते हैं। मौका मिलने पर उनका ध्यानाकर्षित करेंगे।

स्वामी गिरि ने कहा कि यहां के जंगल और जैव विविधता केवल स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय धरोहर हैं। ऐसे में बिना व्यापक जनसहमति, पर्यावरणीय प्रभावों के गंभीर अध्ययन और पारदर्शिता के किसी भी परियोजना को आगे बढ़ाना अनुचित है। उन्होंने कहा कि सच्चा राष्ट्र निर्माण तभी संभव है, जब विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित किया जाए।

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