मुंबई , जनवरी 08 -- इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के तहत सेंटर फॉर इकोलॉजिकल साइंसेज की स्थापना करने वाले जाने-माने पर्यावरणविद डॉ. माधव धनंजय गाडगिल का बुधवार की रात पुणे के एक अस्पताल में निधन हो गया।

वह 83 वर्ष के थे। उनके परिवार में एक बेटा और एक बेटी है। वह कुछ समय से बीमार थे और पुणे के एक अस्पताल में भर्ती थे जहां उन्होंने कल रात अंतिम सांसे ली। उनका अंतिम संस्कार गुरुवार को शाम 4 बजे पुणे के सदाशिव पेठ में वैकुंठ शमशान घाट में किया गया।

श्री गाडगिल को 2024 में प्रतिष्ठित 'चैंपियन ऑफ द अर्थ' पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्हें 1981 में पद्मश्री और 2006 में पद्मभूषण से भी सम्मानित किया गया था। उन्होंने पश्चिमी घाट की जैव विविधता पर लंबे समय तक शोध किया। वह भारत के प्रधानमंत्री की वैज्ञानिक सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य और 2010 के पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ पैनल (डब्ल्यूजीईईपी) के प्रमुख थे, जिसे गाडगिल आयोग के नाम से जाना जाता है। उनकी पश्चिमी घाट पर गाडगिल आयोग के नाम से रिपोर्ट मशहूर है।

श्री गाडगिल ने विकास परियोजनाओं से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान पर गहन अध्ययन किया और कई किताबें लिखीं। उन्होंने दुनियाभर की पत्रिकाओं में सैकड़ों शोध आलेख भी लिखे।

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