जयपुर , अप्रैल 17 -- राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को षडयंत्र करार देते हुए कहा है कि भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा चुनावों के बीच संसद सत्र बुलाकर और विपक्ष से संवादहीनता रखकर जानबूझकर ऐसी परिस्थितियां बनायी, जिससे यह विधेयक पारित न हो सके और इसका ठीकरा विपक्ष पर फोड़ा जा सके।

श्री गहलोत ने शुक्रवार को यहां एक बयान में कहा कि पूर्व में पारित हो चुके महिला आरक्षण कानून को रोकने के लिए भाजपा सरकार यह विधेयक लायी थी, जो एक षड्यंत्र था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सहित पूरी सरकार को यह पहले दिन से मालूम था कि संविधान संशोधन विधेयक विपक्ष के सहयोग के बिना पास नहीं हो सकता। इसके बावजूद उन्होंने विपक्षी दलों को विश्वास में नहीं लिया।

श्री गहलोत ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे लगातार इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग कर रहे थे, परन्तु इतने महत्वपूर्ण विषय पर प्रधानमंत्री ने सभी विपक्षी पार्टियों को एक साथ बुलाकर बात करने के बजाय अलग-अलग बात कर उनमें फूट डालने का प्रयास किया।

उन्होंने कहा कि दक्षिण के राज्यों और पश्चिम बंगाल की आशंकाओं को दूर करने के लिए केंद्र सरकार को वहां के मुख्यमंत्रियों को बुलाकर बात करनी चाहिए थी, जिससे एक भरोसा पैदा होता।

उन्होंने कहा कि राजग सरकार द्वारा बदनीयती से लाया गया यह विधेयक परिसीमन के लिए भी खतरनाक था। जिस तरह असम एवं जम्मू-कश्मीर में विपक्षी पार्टियों को निशाना बनाकर विधानसभा के लिए परिसीमन किया गया, उसके बाद भाजपा सरकार द्वारा किए जाने वाले परिसीमन पर कोई भरोसा नहीं कर सकता।

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