कोयंबटूर , अप्रैल 15 -- कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने परिसीमन के तहत लोकसभा सीटों में वृद्धि के केंद्र सरकार के प्रस्ताव को 'छलावा' करार देते हुए कहा है कि इस योजनाबद्ध कदम से संसद में दक्षिणी राज्यों की आवाज कम हो जायेगी।

श्री चिदंबरम ने 'टेक्सटाइल सिटी' में सत्ताधारी द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन के उम्मीदवारों के लिए चुनाव प्रचार के बीच पत्रकारों से बात करते हुए इसे भाजपा सरकार का सोचा-समझा कदम बताया। उन्होंने संसद के विशेष सत्र के समय पर भी सवाल उठाए, क्योंकि यह सत्र तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे दो महत्वपूर्ण राज्यों में चुनाव प्रचार के चरम पर होने के दौरान बुलाया गया है।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम (एनएसवीए) में संशोधन और लोकसभा सीटों को बढ़ाकर 850 करने के लिए संविधान संशोधन पारित करने के लिए बुलाये गये इस तीन दिवसीय सत्र के समय पर सवाल उठाते हुए श्री चिदंबरम ने कहा कि चूंकि चुनाव प्रचार जोरों पर है, इसलिए चुनावी राज्यों के सांसदों के लिए इसमें शामिल होना मुश्किल होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कदम का उद्देश्य कुछ संशोधनों पर विपक्ष की भूमिका सीमित करना है।

यह स्पष्ट करते हुए कि कांग्रेस मूल रूप से परिसीमन का विरोध नहीं कर रही है उन्होंने कहा कि यह सभी राज्यों के लिए आनुपातिक रूप से समान और निष्पक्ष प्रक्रिया होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों में प्रस्तावित वृद्धि से दक्षिणी राज्यों का आनुपातिक प्रतिनिधित्व कम हो जायेगा और संसद में उनकी पकड़ कमजोर हो जायेगी।

उन्होंने सवाल किया, "हम परिसीमन को मना नहीं कर रहे हैं... कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन एनएसवीए का विरोध नहीं करता है, लेकिन इसे लागू करने की इतनी जल्दी क्या है? वह भी तब जब दो महत्वपूर्ण राज्यों में चुनाव हो रहे हैं और प्रचार अपने चरम पर है?"उन्होंने कहा कि परिसीमन करने से पहले कुल सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत की वृद्धि की योजना 'छलावा' और 'धोखा' है, जो तमिलनाडु जैसे राज्यों के प्रतिनिधित्व में होने वाली वास्तविक गिरावट को छिपा देगा। उन्होंने कहा कि यदि सीधे तौर पर परिसीमन की प्रक्रिया अपनायी जाती तो तमिलनाडु की सीटें 39 से घटकर 32 रह जातीं, जो जनता के सामने स्पष्ट रूप से उजागर हो जाता।

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