, Dec. 17 -- निर्दलीय सासंद उमेशभाई पटेल ने कहा कि इस विधेयक के माध्यम में परमाणु कार्यक्रम के जनक होमी जहांगीर भाभा के सपनों को साकार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र की भागीदारी से ऊर्जा क्षेत्र को बढावा मिलेगा। यह आर्थिक विकास को गति देगा और स्वच्छ ऊर्जा की प्राप्ति होगी। यह विधेयक सही ढंग से लागू किया गया तो भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में स्वतंत्र बना सकता है।

आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर ने कहा कि यह विधेयक कारपोरेट क्षेत्र को सुरक्षा और लोगों को असुरक्षा देने वाला है। उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी कंपनियों को लाना उचित नहीं है। यह विधेयक पीड़ितों पर कानूनी कैप लगाने का काम करेगा जो लोगों के हित में नहीं है। हम विकास के खिलाफ नहीं है लेकिन जनसुरक्षा को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

एन.के. प्रेमचंद्रन ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि विकास कल्याण और नियंत्रण लोगों के हित में था उसमें परिवर्तन किया जा रहा है। परमाणु ऊर्जा के निजीकरण करने की क्या आवश्यकता है। परमाणु ऊर्जा का पूरी तरह निजीकरण कर दिया जाएगा जो सही नहीं है। जब यह कानून पास हो जायेगा तो रेयर अर्थ धातु के खनन का काम भी निजी हाथों में दे दिया जायेगा। सरकार को बताना चाहिए कि इसके निजीकरण से परमाणु ऊर्जा का भविष्य क्या होगा। इस विधेयक में परमाणु आपूर्ति के दायित्व को भी कम कर दिया गया है।

कांग्रेस की सुधा आर ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि परमाणु ऊर्जा महत्वपूर्ण क्षेत्र है जिसमें लाभ को प्राथमिकता नहीं दी जा सकती है। परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में 49 प्रतिशत एफडीआई को अनुमति दी जा रही है क्या यह अमेरिका का दबाव में किया जा रहा है। यह विधेयक संघीय ढांचे पर भी हमला है। सरकार ने जो सामाजिक दायित्व तय किया है वह बहुत कम है। परमाणु क्षेत्र में सत्तर साल तक जो मेहनत हुई है उसे खराब किया जा रहा है। यह विधेयक अमानवीय है।

भाजपा के मनीष जायसवाल ने कहा कि यह विधेयक साधारण नहीं बल्कि भारत के लिए दूरदर्शी और परिवर्तनकारी है। यह शांति और सतत विकास का मार्ग प्रशस्त करने वाला है। विपक्ष को ऐसा क्यों लगता है कि इस विधेयक में सुरक्षा मानकों से समझौता किया गया। उन्होंने कहा कि केवल दुर्घटना के डर से निर्णय लेना बंद करने से समस्या से समाधान नहीं होने वाला है। सरकार ने हर क्षेत्र में दुर्घटना पर नियंत्रण हासिल करने का काम किया है। हमारी सरकार सुरक्षा के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं कर रही है। यह विधेयक भविष्य की जरूरत है।

समाजवादी पार्टी के पुष्पेन्द्र सरोज ने कहा कि विधेयक के शीर्षक से पता नहीं चलता है कि इस विधेयक का उद्देश्य क्या है। उन्होंने कहा कि एक ही रात में भोपाल गैस त्रासदी में बड़ी संख्या में लोग मारे गये और आज भी उसके प्रभाव से लोग पीड़ित है। यह विधेयक ऐसा बनाया गया कि दुर्घटना की स्थिति में आपूर्तिकर्ता पर दायित्व कम कर दिया गया। विधेयक परमाणु दुर्घटना में पीड़ितों को अदालत जाने का अधिकार छीनने वाला है। उन्होंने कहा कि जो सरकार प्रदूषण पर बात नहीं करना चाहती है वह परमाणु संयत्र से निकलने वाले कचरे पर किस प्रकार गंभीरता दिखायेगी।

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