नयी दिल्ली , दिसंबर 17 -- लोक सभा में बुधवार को विपक्ष ने मांग की कि भारत के बदलाव के लिए परमाण ऊर्जा का सतत दोहन और वृद्धि विधेयक, 2025 देश की सुरक्षा और ऊर्जा क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण कारकों को समाहित करता है, अत: इसे संयुक्त संसदीय समिति या स्थायी समिति को भेजने के बाद ही सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए लाया जाना चाहिए।
विधेयक पर चर्चा शुरू होने से पहले ही कांग्रेस के के सी वेणुगोपाल ने कहा कि इस विधेयक पर बिन्दुवार बहुत व्यापक चर्चा की आवश्यकता है, इसलिए इसे संयुक्त संसदीय समिति या स्थायी समिति के पास भेजा जाये। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के लिए दूरगामी परिणामों से जुड़ाव रखने वाले इस विधेयक पर बहुत विस्तृत चर्चा की आवश्यकता है।
अध्यक्ष ओम बिरला ने इस पर कहा कि वह विधेयक पर विस्तार से चर्चा कराने के लिए तैयार हैं और जो भी सदस्य अपनी बात रखना चाहेगा, उसे मौका दिया जायेगा।
विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के मनीष तिवारी ने कहा कि यह विधेयक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोल देने वाला साबित होगा। यह परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के लिए 49 से लेकर 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का मार्ग प्रशस्त करेगा। उन्होंने कहा कि यह संयोग हो सकता है कि कुछ दिनों पूर्व ही देश के बहुत बड़े औद्योगिक घराने ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में प्रवेश की मंशा जाहिर की थी और सरकार यह विधेयक ले आयी।
इस पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने आपत्ति जतायी और परमाणु ऊर्जा विभाग के राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह ने इसे निराधार बताया।
श्री तिवारी ने कहा कि यदि कोई दुर्घटना हो जाती है तो परमाणु ऊर्जा के लिए यूरेनियम आदि आपूर्तिकर्ताओं की कोई जिम्मेदारी निर्धारित करने का कोई प्रावधान यह विधेयक नहीं करता है। संबंधित मंत्री को इस पर स्पष्टीकरण देना चाहिए। नाभिकीय ऊर्जा विनियामक बोर्ड को स्वायत्ता प्रदान की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा संयंत्र के अपशिष्ट का निपटान कैसे किया जायेगा, इस पर भी विधेयक में कोई स्पष्टता नहीं है। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र को देश में परमाणु ऊर्जा के लिए खोल देने से स्वच्छ और हरित ऊर्जा के लिए उचित नहीं होगा।
श्री तिवारी ने कहा कि विधेयक में और भी कई कमियां हैं तथा इससे समस्यायें उत्पन्न होंगी। इस विधेयक की पंक्ति दर पंक्ति चर्चा होनी चाहिए, तभी इसे यहां चर्चा और पारित कराने के लिए लाया जाना चाहिए। उन्होंने विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति को भेजने की मांग की।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शशांक मणि ने कहा कि इस विधेयक के पारित हो जाने से परमाणु ऊर्जा उत्पादन को गति मिलेगी। विकसित भारत के लिए 100 गीगावाट विद्युत की जरूरत पड़ेगी। यह विधेयक उस दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। देश में परमाणु ऊर्जा का उत्पादन अभी दो से तीन प्रतिशत के बीच ही है, इसे बढ़ाने की बहुत आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि फ्रांस में कुल ऊर्जा उत्पादन में परमाणु ऊर्जा 65 प्रतिशत और अमेरिका में इस ऊर्जा का हिस्सा 30 फीसदी है। अमेरिका में कुल परमाणु ऊर्जा का 60 प्रतिशत उत्पादन निजी क्षेत्र करता है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में निजी कंपनियों को लाया ही जाना चाहिए, जहां एकाधिकार होता है, वहां नवाचार नहीं होता। प्रौद्योगिकी, पूंजी और प्रतिभा को आगे लाने से देश की तरक्की तेज गति से हो सकेगी।
श्री मणि ने कहा कि विधेयक में ऐसे प्रावधान किये गये हैं जिससे सुरक्षा को लेकर किसी तरह की गड़बड़ी की आशंका नहीं है। संचालक की स्वतंत्रता के साथ ही सुरक्षा के मानकों का पालन सुनिश्चित कराया जायेगा। विवादों के समाधान के लिए ढांचागत सुधार के प्रावधान किये गये हैं। देश में स्वच्छ और किफायती ऊर्जा के लिए तैयारी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि विधेयक विशेषज्ञों से सलाह-मशविरे के बाद तैयार किया गया है। इसे जन कल्याण की भावना से लाया गया है। परमाणु ऊर्जा का उत्पादन बढ़ने से देश के हर व्यक्ति की बेहतरी के लिए कुछ न कुछ किया जा सकेगा।
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