नयी दिल्ली , दिसंबर 18 -- राज्य सभा ने " भारत के बदलाव के लिए परमाणु ऊर्जा के सतत दोहन और वृद्धि विधेयक, 2025 (शांति विधेयक) को' गुरुवार को चर्चा और सरकार की ओर से जवाब के बाद ध्वनि मत से पारित कर दिया।

इसके साथ ही परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी क्षेत्र को प्रवेश देने के ऐतिहासिक प्रावधान वाले इस विधेयक को संसद के दोनों सदनों की स्वीकृति मिल गयी है। लोक सभा में इसे बुधवार को पारित किया गया था।

करीब चार घंटे की चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय , कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग के राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने इस विधेयक को लेकर विपक्षी सदस्यों की तमाम आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि इस विधेयक को तैयार करने में विभिन्न हितधारकों के साथ चर्चा की गयी थी और नियमों के निर्धारण में भी इस प्रक्रिया को अपनाया जाएगा।

डॉ सिंह ने कहा कि 2009 से आज तक बहुुत तेजी से परिवर्तन हो गये हैं और परमाणु ऊर्जा का क्षेत्र सुरक्षित तरीके से बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि उस समय कृत्रिम मेधा ( एआई) प्रौद्योगिकी के बारे में किसी ने भी नहीं सोचा था।

उन्होंने कहा कि भारत में विकसित भारत लघु रिएक्टर और छोटे माड्यूलर रिएक्टरों दोनों को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य है। उन्होंने दूरसंचार और बिजली क्षेत्र के बाद अब अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी निवेश के प्रवेश के लाभों का उल्लेख करते हुए कहा कि परमाणु ऊर्जा और अनुसंधान क्षेत्र को भी इसी तरह का लाभ मिलेगा।

उन्होंने कहा कि इस विस्तृत विधेयक में पिछले विभिन्न विधेयकों के प्रावधानों को सुगठित किया गया है लेकिन परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में संरक्षा के प्रावधानों में कोई समझौता नहीं है। उन्होंने कहा कि इसमें सुरक्षा से पहले परमाणु सम्पत्तियों की संरक्षा को स्थान दिये जाने का ध्यान रखा गया है।

उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा विनियामक बोर्ड को इसके माध्यम से सांविधिक निकाय बनाया गया है तथा निजी निवेशकों को भी अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा ऐजेंसी की निगरानी में रखने के प्रावधान है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत में परमाणु संयंत्रों के लिए चयनित स्थल बड़े भूकंपीय क्षेत्रों से बहुत दूर हैं। भारत में परमाणु बिजली घरों के विकिरण से आबादी में कैंसर फैलने के कुछ सदस्यों के वक्तव्यों को अस्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं है और भारत में परमाणु रिऐक्टरों के विकिरण का स्तर सुरक्षा की दृष्टि से यथेष्ट स्तर से बहुत कम है।

परमाणु ऊर्जा राज्य मंत्री ने कहा कि इस सरकार ने परमाणु संयंत्रों की साइबर सुरक्षा का विशेष ध्यान ध्यान रखा है जो 2010 के नियम में नहीं था। इसके साथ सुरक्षा और संरक्षा की बहु स्तरीय व्यवस्था को अधिक उन्नत करने की व्यवस्था की गयी है।

उन्होंने कहा कि इस विधेयक में परमाणु ऊर्जा निवारण (शिकायत) समाधान आयोग की व्यवस्था है, और उसके निर्णय के खिलाफ सिविल कोर्ट में चुनौती की छूट दी गयी है। उन्होंने कांग्रेस के श्री जयराम रमेश द्वारा उठाए गए मुद्दों का जवाब देते हुए आश्वासन दिया कि "परमाणु ऊर्जा क्षेत्र की गाड़ी का इंजन सरकारी क्षेत्र में ही रहेगा।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि परमाणु ईंधन के स्रोतों की खोज में निजी क्षेत्र को अनुमति दी जा सकती है पर उत्खनन का काम सरकारी क्षेत्र में ही रहेगा।

विदेशी दवाब जैसे कुछ राजनीतिक आरोपों का जवाब देते हुए उन्होंने श्री नटवर सिंह की किताब 'वन लाइफ इज नाट एनफ' का जिक्र किया, जिसमें लेखक ने लिखा है कि कांग्रेस की नेता श्रीमती सोनिया गांधी ने उन्हें विदेश मंत्री न बनाने के लिए अमेरिका के दबाव की बात बतायी थी।

तृणमूल कांग्रेस की सागरिका घोष के आरोपों का जवाब देते हुए डॉ सिंह ने कहा कि वह पत्रकार रहीं है उन्हें भोपाल गैस दुर्घटना की जिम्मेदार यूनियन कार्बाइड के अधिकारी वारेन एंडर्सन को भोपाल से दिल्ली लाने के तरीके और इतालवी व्यापारी ओतावियो क्वात्रोची के खिलाफ लुक-आउट नोटिस हटाने के बारे में खबरों की जानकारी होगी। उनके इन वक्तव्यों पर श्रीमती घोष सहित विपक्षी सदस्यों ने आपत्ति की। श्रीमती घोष ने व्यवस्था का प्रश्न उठाया जिसे उप सभापति ने खारिज कर दिया।

डॉ सिंह ने अपने जवाब में यह भी कहा कि मनमोहन सरकार ने परमाणु ऊर्जा क्षमता के जो लक्ष्य रखे थे वे पूरे नहीं हुए ।

उन्होंने परमाणु दायित्व कोष कम रखे जाने की आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि इस विधेयक में सरकार की ओर से परमाणु क्षतिपूर्ति कोष बनाए जाने का प्रावधान है जिससे यदि, मान लीजिए 20 हजार करोड़ रुपये तक की क्षतिपूर्ति की जरूरत पड़ी तो उसका प्रबंध किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि यह चिकित्सा , कृषि , खाद्य संरक्षा जैसे क्षेत्रों में परमाणु प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने वाला विधेयक है।

'भारत लघु रिएक्टर' और ' लघु माड्यूलर रिएक्टर' के बीच अंतर के बारे में श्री जयराम रमेश के हस्तक्षेप को स्वीकार करते हुए डॉ सिंह ने कहा कि पांच मेगावाट के अति छोटे रिएक्टर, 55 मेगावाट और 100-150 तथा 200 मेगावाट के बीच की क्षमता के पांच छोटे और माड्यूलर रिएक्टरों को मानकीकृत कर सरकार उन्हें अपनाने का लक्ष्य रखती है।

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