पन्ना , मार्च 17 -- मध्यप्रदेश के पन्ना जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया गया है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट ऊषा परमार ने पेयजल संकट की संभावित स्थिति को देखते हुए जनहित में यह आदेश जारी किया है।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार म.प्र. पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 3 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए जिले के सभी विकासखंडों एवं नगरीय क्षेत्रों को 16 मार्च से 20 जुलाई 2026 तक जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया गया है। इस निर्णय का उद्देश्य जिले में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना और आम जनता की जरूरतों की पूर्ति करना है।

बताया गया है कि सिंचाई सहित अन्य कार्यों में भूगर्भीय जल के अत्यधिक दोहन के कारण जल स्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। नलकूपों एवं अन्य जल स्रोतों का जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है, जिससे आने वाले समय में पेयजल संकट की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है।

इसी के मद्देनजर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा निजी नलकूप खनन पर प्रतिबंध लगाने की अनुशंसा की गई थी। आदेश लागू होने के बाद अब कोई भी व्यक्ति बिना अनुमति के शासकीय भूमि पर स्थित जल स्रोतों का उपयोग पेयजल एवं घरेलू उपयोग के अतिरिक्त अन्य किसी प्रयोजन के लिए नहीं कर सकेगा।

जिले के सभी नदी, नालों, स्टॉप डैम, सार्वजनिक कुओं तथा अन्य जल स्रोतों के जल का उपयोग भी नियंत्रित किया गया है, ताकि पेयजल के लिए पर्याप्त भंडारण सुरक्षित रखा जा सके।

आदेश के तहत जल अभावग्रस्त क्षेत्र में कोई भी व्यक्ति अनुविभागीय दंडाधिकारी की अनुमति के बिना नया नलकूप नहीं खोद सकेगा। हालांकि शासकीय नलकूप खनन पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा।

निजी भूमि पर नलकूप खनन के लिए संबंधित व्यक्ति को निर्धारित प्रारूप में शुल्क सहित आवेदन अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को प्रस्तुत करना होगा। अनुमति प्रदान करने से पूर्व संबंधित एसडीएम द्वारा आवश्यक जांच के साथ जनपद पंचायत सीईओ, तहसीलदार एवं नगरीय निकाय के मुख्य नगरपालिका अधिकारी से अभिमत लिया जाएगा।

आदेश में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि किसी क्षेत्र में सार्वजनिक पेयजल स्रोत पूरी तरह सूख जाते हैं और वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध नहीं होती है, तो संबंधित एसडीएम संशोधित अधिनियम 2002 की धाराओं के तहत निजी जल स्रोतों का अस्थायी अधिग्रहण कर सकेंगे।

निर्देशों का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध म.प्र. पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 (संशोधन 2022) की धारा 9 तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

कलेक्टर ने जिले के सभी अनुविभागीय मजिस्ट्रेट, तहसीलदार, कार्यपालिक मजिस्ट्रेट, पुलिस अधिकारियों, पीएचई विभाग के फील्ड अमले, नगरीय निकायों के अधिकारियों तथा ग्राम पंचायतों के सचिवों को आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं।

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