गांधीनगर , फरवरी 03 -- गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने मंगलवार को ग्राम पंचायतों के सरपंचों को ग्रामीण स्तर पर अधिक पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही के साथ विकसित भारत के लिए विकसित ग्राम का कर्तव्य निभाने का आह्वान किया।
श्री पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इस वर्ष का केंद्रीय बजट भी कर्तव्य को मुख्य आधार बनाकर तैयार किया गया है, इतना ही नहीं इस बजट में ग्रामीण विकास पर विशेष जोर दिया गया है। इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि देश के विकास में गांवों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सरपंचों को गांव के मुखिया के रूप में जिम्मेदारीपूर्वक कर्तव्य निभाकर विकसित भारत के निर्माण में 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' के मंत्र से जनशक्ति को जोड़ने का प्रेरक मार्गदर्शन दिया।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष शंकरभाई चौधरी तथा मंत्री ऋषिकेशभाई पटेल एवं कुंवरजीभाई बावलिया की उपस्थिति में गुजरात विधानसभा में गणेश वासुदेव मावलंकर संसदीय अध्ययन एवं प्रशिक्षण ब्यूरो के उपक्रम में 'ग्राम शक्ति प्रशिक्षण कार्यक्रम' का आज शुभारंभ किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में उत्तर गुजरात के बनासकांठा, वाव-थराद, मेहसाणा, पाटण, साबरकांठा और अरवल्ली जिलों की विभिन्न तहसील के 260 से अधिक सरपंच सहभागी हुए। गांवों को भारत की आत्मा कहा जाता है; इस भावना को स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब गांव के सभी लोग एक साथ विकास कार्यों में जुड़ते हैं, तब गांव का विकास चमक उठता है।
मुख्यमंत्री ने प्रेरणा देते हुए कहा कि सरपंच के रूप में मिली सेवा के अवसर को अपनी लगन और गांव के विकास के लिए कुछ बेहतर करने की भावना से योजनाबद्ध रूप से विकास कार्यों की सूची बनाकर प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए सेचुरेशन अप्रोच से 100 प्रतिशत लक्ष्य के साथ अनुदान का उपयोग हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरपंचों की प्राथमिक जिम्मेदारी गांव के सुदूरवर्ती व्यक्ति तक सरकारी सुविधाएं और योजनाओं का लाभ पहुंचाने की है। जब गांवों का विकास होगा, तभी देश का वास्तविक विकास होगा।
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