गांधीनगर , फरवरी 23 -- गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल भारतीय अध्यात्म एवं वैदिक ज्ञान को विश्व पटल पर गुंजायमान करने वाले अंतरराष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ (इस्कॉन) के संस्थापक आचार्य श्रील प्रभुपाद के प्रेरणादायी जीवन चरित्र पर गुजराती में प्रकाशित पुस्तक 'विश्वगुरु श्रील प्रभुपाद' का हरे कृष्ण मूवमेंट, अहमदाबाद द्वारा आयोजित भव्य समारोह में सोमवार को गांधीनगर में अनावरण किया।
श्री पटेल ने श्रील प्रभुपाद के जीवन चरित्र पर आधारित इस पुस्तक के अनावरण अवसर पर अभिनंदन देते हुए कहा कि उनकी यात्रा संघर्षों से भरी हुई थी, लेकिन श्री कृष्ण पर उनके अटूट विश्वास ने उन्हें अपार सफलता दिलायी। आम आदमी जब मुश्किल में हार जाता है, तब भगवद् गीता के संदेश के माध्यमसे मिला दृढ़ विश्वास ही जीवन का सच्चा मार्ग बताता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रील प्रभुपादजी की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सिक्का एवं पोस्टल स्टाम्प जारी कर उनके वैश्विक प्रभाव को सम्मानित किया गया था। यह पुस्तक देश के 'आध्यात्मिक राजदूत' श्रील प्रभुपादजी के असाधारण संघर्ष, उनकी वैश्विक आध्यात्मिक यात्रा तथा विश्वभरमें भारतीय संस्कृति के प्रसार में उनके अमूल्य योगदान को उजागर करती है।
इस पुस्तक की लेखिका डॉ उषाबेन उपाध्याय को अभिनंदन देते हुए श्री पटेल ने कहा कि डॉ. उषाबेन ने श्रील प्रभुपादजी के जीवन चरित्र का गुजराती में वर्णन कर राज्य की जनता तक उनके प्रभावशाली विचारों को पहुंचाने का भगीरथ कार्य किया है। श्रीमद् भगवद् गीता में दिये गये संदेश के विषय में वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट व्यावहारिक जीवन जीने के लिए गीता की महिमा अनिवार्य है। श्री कृष्ण के जीवन प्रसंगों द्वारा समझाया गया कि अधर्म का नाश निश्चित है। हमारे लिए केवल धीरज एवं आंतरिक शांति बनाए रखना जरूरी है। श्री राम के आचरण तथा श्री कृष्ण के वचनों को जीवन में उतार कर मोक्ष की ओर मार्ग सरल बनता है।
उन्होंने कहा कि इस्कॉन द्वारा विश्वभर में भौतिकता के पीछे दौड़ने वाले नागरिकों को अध्यात्म की ओर मोड़ने का जो कार्य हुआ है, वह अद्भुत है। विदेशी भक्त जिस प्रकार सर्वस्व त्यागकर कृष्ण भक्ति में लीन होते हैं, वह उनके संपूर्ण समर्पण का प्रमाण है। यह पुस्तक गुजरात के युवाओं से लेकर प्रत्येक पीढ़ी के लिए वरदानस्वरूप सिद्ध होगी। मुख्यमंत्री ने श्रील प्रभुपादजी के विरल व्यक्तित्व एवं विश्वभर में कृष्ण भक्ति के प्रसार में उनके योगदान की प्रशंसा की।
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